मुख्य चुनाव अधिकारी पार्टी द्वारा प्रस्तुत पोस्टरों को मंजूरी देने से करने करने के फैसले की समीक्षा करें: शिरोमणी अकाली दल

कहा कि ये पोस्टर बहन बीबा कमलदीप कौर राजोआणा की पंजाबियों से ‘बंदी वीर’ को मुक्त कराने के लिए उनकी मदद करने की अपील

चंडीगढ़/11जून: शिरोमणी अकाली दल ने आज मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) से संगरूर संसदीय उपचुनाव के लिए होर्डिंग्स और उनपर लगाने के लिए पार्टी द्वारा प्रस्तुत पोस्टर को मंजूरी देने से इंकार करने के निर्णय की समीक्षा करने की अपील की है।

यहां पत्रकारों को संबोधित करते हुए पार्टी के वरिष्ठ नेता डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि आयोग की मीडिया प्रमाणन और मॉनिटरिंग कमेटी ने अकाली दल द्वारा प्रस्तुत किए गए पोस्टरों को इस आधार पर खारिज कर दिया कि इससे जनता में परेशानी और अनावश्यक शांति पैदा होगी।

यहां पत्रकारों को पोस्टर दिखाते हुए डॉ. चीमा ने कहा कि वे अपनी बहन बीबा कमलदीप कौर राजोआणा से सभी ‘‘ बंदी वीर’’ को रिहा करने की अपील कर रही हैं। ‘‘एक बहन ने अपने भाई राजोआणा सहित बंदियों की रिहाई के लिए पंजाबियों से मदद मांगी है। यह उसका अधिकार है। यह कहने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार के अंतर्गत भी आता है’’।

यह कहते हुए कि मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) , पंजाब ने पोस्टरों के लिए अनुमति देने से इंकार कर दिया, डॉ. चीमा ने कहा कि इन पोस्टरों को जारी करने से राज्य में शांति में किसी भी तरह से गड़बड़ी का कोई सवाल ही पैदा नही होता है। इस तरह के पोस्टरों का इस्तेमाल पहले भी 1989 में अकाली नेता सिमरनजीत सिंह मान और अंतिदरपाल सिंह के चुनाव के दौरान भी  किया जा चुका है’’।

अकाली नेता ने कहा  कि बंदी सिंहों की रिहाई का मुददा भी मानवाधिकार का मुददा है , भाई राजोआणा को 28 साल से पैरोल के बिना जेल में रखा गया है। ‘‘ अन्य बंदियों ने भी उम्रकैद की सजा के मामले में अन्य के मुकाबले बहुत ज्यादा सजा काट चुके हैं’’। उन्होने यह भी बताया कि एस.जी.पी.सी ने 2012 राष्ट्रपति के समक्ष भाई राजोआणा के लिए एक दया याचिका दायर की थी, सुप्रीम कोर्ट द्वारा सरकार को इस मामले में कार्रवाई करने के लिए कहने के बावजूद  केंद्र सरकार द्वारा अब तक इस पर कोई निर्णय नही लिया गया है।

डॉ. चीमा ने कहा कि अकाली दल मानवाधिकारों का समर्थक है और बंदी सिंहों के अधिकारों के बारे जागरूकता पैदा करना जारी रखेगा। उन्होने कहा कि इससे पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री सरदार परकाश सिंह बादल ने इन सब बाधाओं के बावजूद 2012 में भाई राजोआणा को फांसी देने से इंकार कर दिया था। उन्होने कहा कि  अकाली दल का नागरिक अधिकारों की रक्षा करने का एक लंबा इतिहास रहा है।  शिरोमणी अकाली दल ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लागू इमरजेंसी का विरोध किया था।

उन्होने यह भी घोषणा की कि अकाली दल मुख्य निर्वाचन अधिकारी के आदेशों की समीक्षा के लिए एक आवेदन पेश करेगी।

 

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