कैप्टन अमरिन्दर सिंह सरकार द्वारा आढ़तियों के सम्मिलन को जारी रखने को सुनिश्चित बनाने के लिए सॉफ्टवेयर में सुधार करने के बाद पंजाब में गेहूँ की खरीद शुरू

Punjab Chief minister Captain Amrinder singh

आढ़तियों द्वारा हड़ताल ख़त्म, मुख्यमंत्री द्वारा भरोसा, ‘‘जब तक मैं यहाँ हूँ, आप व्यवस्था का हिस्सा बने रहोगे।’’
कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने आढ़तियों को बताया, ‘‘सीधी अदायगी के मुद्दे पर हमने सख़्त लड़ाई लड़ी परन्तु केंद्र ने पंजाब से खरीद न करने की धमकी दी’’
चंडीगढ़, 10 अप्रैल:
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह के भरोसे के बाद आढ़तियों द्वारा अपनी प्रस्तावित हड़ताल ख़त्म कर देने से पंजाब में आज गेहूँ की खरीद शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री ने खरीद प्रक्रिया में आढ़तियों की निरंतर सम्मिलन को सुनिश्चित बनाने और 131 करोड़ रुपए की बकाया राशि की एफ.सी.आई. से अदायगी होने का इन्तज़ार किए बिना तुरंत जारी करने समेत कई और कदम उठाने के हुक्म दिए हैं।
मुख्यमंत्री के आदेशों पर राज्य के खाद्य एवं सिविल आपूर्ति विभाग ने खरीद सम्बन्धी सॉफ्टवेयर में संशोधन कर दिया है, जिससे किसानों को फ़सल की अदायगी जारी करने की प्रक्रिया में आढ़तियों का सम्मिलन सुधारे गए रूप में ही सही, बनी ज़रूर रहेगी, जबकि राज्य सरकार द्वारा निर्धारित समय के अनुसार किसानों को 48 घंटों में उनके बैंक खातों में अदायगी मिल जाएगी।
पंजाब के आढ़तियों के हितों की रक्षा के लिए अपनी स्पष्ट वचनबद्धता का ऐलान करते हुए कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि आढ़तियों को न्युनतम समर्थन मूल्य से बाहर रखने संबंधी भारत सरकार के निर्देशों के बावजूद वह खरीद प्रक्रिया के साथ हमेशा जुड़े रहेंगे। उन्होंने कहा, ‘‘जब तक मैं यहाँ हूँ, आप व्यवस्था का हिस्सा बने रहोगे और आपकी भूमिका हमेशा कायम रहेगी।’’ उन्होंने कहा कि वह यकीन दिलाते हैं कि ए.पी.एम.सी. एक्ट के अंतर्गत आढ़तिया कमीशन और अन्य लागतें जारी रहेंगी।
भारत सरकार द्वारा सीधी अदायगी की प्रणाली को मुलतवी करने के लिए राज्य सरकार की अपील को मानने से इनकार कर देने पर टिप्पणी करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘इस मुद्दे पर हमने केंद्र से सख़्त लड़ाई लड़ी, परन्तु वह अड़े रहे और यहाँ तक कि सीधी अदायगी की प्रणाली को लागू न करने की सूरत में पंजाब से खरीद न करने की धमकी देने तक गए।’’
मुख्यमंत्री ने वित्त विभाग को 131 करोड़ रुपए की बकाया राशि भारतीय खाद्य निगम (एफ.सी.आई.) का इन्तज़ार किए बिना तुरंत जारी करने के हुक्म दिए, क्योंकि कुछ आढ़तियों द्वारा विवरण अपलोड न करने के कारण एफ.सी.आई. ने यह राशि रोकी थी। उन्होंने कहा कि इन आढ़तियों को उस समय पर शायद ऐसे लोगों ने रोक दिया हो, जो राजनीति खेलना चाहते हों। उन्होंने कहा कि चाहे कि एफ.सी.आई. से यह राशि अभी आनी है परन्तु उनकी सरकार इसका इन्तज़ार किए बिना तुरंत जारी करेगी। मुख्यमंत्री ने आढ़तियों को भरोसा दिया कि उनकी सरकार एफ.सी.आई. द्वारा लेबर की अदायगी में 30 प्रतिशत की कटौती का मुद्दा केंद्र सरकार के पास उठाएगी।
कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने फेडरेशन ऑफ आढ़तिया एसोसिएशन ऑफ पंजाब के प्रधान विजय कालड़ा का उनकी सरकार द्वारा संभावित हड़ताल वापस लेने सम्बन्धी की गई अपील को मानने और अनाज की लिफ्टिंग करने के लिए धन्यवाद किया, नहीं तो किसानों को नुकसान बर्दाश्त करना पड़ता। उन्होंने आढ़तियों से अपील करते हुए तुरंत ही खऱीद शुरू करने और कोविड सम्बन्धी नियमों का पालन करने के लिए कहा। मौजूदा वर्ष कोविड-19 के दूसरे दौर के कारण सरकार को पहले निर्धारित 1 अप्रैल की जगह पर खऱीद प्रक्रिया 10 अप्रैल तक मुलतवी करनी पड़ी थी।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि इस वर्ष भी बीते वर्ष की तरह किसानों को पास जारी किए जाएंगे, जिससे कोविड महामारी की स्थिति को देखते हुए मंडियों में भीड़ घटाई जा सके। उन्होंने यकीन दिलाया कि किसानों को पास जि़ला स्तर पर आढ़तियों से विचार-विमर्श के बाद जारी किए जाएंगे, क्योंकि आढ़तियों को यह अच्छी तरह पता है कि कौन से किसान ने अपनी फ़सल की कटाई कर ली है और वह मंडी में आने के लिए तैयार है।
आढ़तियों के दुख-दर्द को साझा करते हुए, जिसके बारे में उन्होंने कहा कि वह दिल की गहराईयों से इसको महसूस करते हैं, मुख्यमंत्री का कहना था कि उनको यह समझ नहीं आ रहा कि केंद्र सरकार उन (आढ़तियों) और किसानों के साथ ऐसा बुरा सलूक क्यों कर रही है। उन्होंने याद करते हुए कहा कि आढ़तिया प्रणाली तब भी चलती थी जब वह छोटे थे और अपने दादा जी के साथ मंडियों में जाते थे। उन्होंने आगे कहा कि यह बात समझ से बाहर है कि भारत सरकार इस प्रणाली को बर्बाद करने पर क्यों तुली हुई है, क्योंकि आढ़तिये कोई बिचौलियागिरी नहीं करते बल्कि सेवाएं प्रदान करते हैं और निजी क्षेत्र का कामकाज मौजूदा प्रणाली के साथ चल सकता है, इसलिए मौजूदा प्रणाली को बदले जाने की कोई ज़रूरत नहीं है।
किसानों की आमदनी में 72 प्रतिशत वृद्धि का जि़क्र करते हुए मुख्यमंत्री ने इसका सेहरा किसानों और आढ़तियों द्वारा मिलकर किए जाने वाले सहृदय यत्नों के सिर बाँधा। उन्होंने आगे कहा, हरित क्रांति लाने में और भारत के अनाज भंडारों को पूरी तरह से भरने में आपके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने आगे बताया कि वह केंद्र सरकार द्वारा कृषि सम्बन्धी उठाए जा रहे कदमों के साथ बिल्कुल भी सहमत नहीं हैं और उन्होंने यह भरोसा दिया कि आढ़तियों के सभी अंदेशे दूर किए जाएंगे और उनके साथ किए गए सभी वादे पूरे किए जाएंगे।
हड़ताल वापस लेने को राज्य और इसके किसानों के हित में बताते हुए, विजय कालड़ा ने कैप्टन अमरिन्दर सिंह और उनकी सरकार द्वारा केंद्र के साथ लड़ाई में आढ़तियों का साथ देने के लिए धन्यवाद किया। विजय कालड़ा ने आगे कहा कि केंद्र सरकार, किसान आंदोलन खड़ा करने के लिए पंजाब को सज़ा देने पर तुली हुई है। इस मौके पर खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामलों के मंत्री भारत भूषण आशु ने मुख्यमंत्री को अवगत करवाया कि आढ़तिये तो बस अपनी व्यापारिक गतिविधियों और रोज़ी-रोटी की सुरक्षा चाहते हैं।