ऑनलाइन लोक अदालत के माध्यम से 33 हजार प्रकरणों का निस्तारण, 236 करोड़ के अवार्ड पारित

court

Sorry, this news is not available in your requested language. Please see here.

जयपुर, 22 अगस्त। आॅनलाइन लोक अदालत के माध्यम से राज्य भर में लंबित प्रकरणों एवं प्री-लिटिगेशन के 33 हजार 476 प्रकरणों का निस्तारण करते हुए 236 करोड़ 53 लाख 59 हजार 905 के अवार्ड पीड़ित पक्ष को पारित किये। राष्टंीय विधिक सेवा प्राधिकरण 1⁄4नाल्सा1⁄2 के कार्यकारी अध्यक्ष एवं सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधिपति श्री एनवी रम्मन्ना की अध्यक्षता में शनिवार को आॅनलाइन समापन समारोह हुआ।
राज्य भर में आॅनलाइन लोक अदालत में 66 हजार 367 प्रकरण रैफर किये गये हैं। सम्पूर्ण राज्य के अधीनस्थ न्यायालयों में आॅनलाइन लोक अदालत के लिए कुल 350 बेंचों का गठन किया गया जिसमें प्री-लिटिगेशन एवं राजीनामा योग्य सभी प्रकृति के प्रकरण दीवानी, राजस्व, श्रम, मोटर वाहन दुर्घटना दावा, पारिवारिक मामले, बैंक, बीमा, कम्पनी व रोडवेज आदि से संबंधित प्रकरणों का कम्प्यूटर एवं इन्टरनेट सुविधा का उपयोग कर राजीनामा के जरिये निस्तारित किये जाने का प्रयास किया गया।
आॅनलाइन लोक अदालत में सबसे पहले पक्षकार, बैंक, बीमा कम्पनी, अधिवक्तागण तथा न्यायालय मामलों को चिन्हित करके आॅनलाइन लोक अदालत प्लेटफार्म पर ईमेल या व्हाट्सएप के माध्यम से रैफर किए गए। तत्पश्चात् विरोधी पक्षकार को आॅन लाइन लोक अदालत में प्रकरण लगवाने के लिए सहमति प्राप्त करने हेतु नोटिस द्वारा सूचना प्रेषित की गयी। विरोधी पक्षकार मामले को लोक अदालत में लगवाने के लिए सहमत होने पर प्रकरण में प्री-काउंसलिंग वीडियो चेट के माध्यम से रिटायर्ड न्यायिक अधिकारी, अध्यक्ष, स्थायी लोक अदालत व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव द्वारा की गई एवं दोनों पक्षकार एवं अधिवक्तागण को भी प्री-काउंसलिंग में अपने-अपने घर से ही वीडियो चेट से जोड़ा गया। मामले में सहमति बनने के पश्चात् राजीनामा लिखित में तैयार किया जाकर दोनों पक्ष को जरिए ई-मेल एवं व्हाट्सएप प्रेषित कर उनके इलेक्टंाॅनिक हस्ताक्षर सुरक्षित माध्यम से राजीनामे पर लिए गए।
राल्सा के सदस्य सचिव श्री बजेन्द्र कुमार जैन ने बताया कि कोरोना जैसी महामारी से बचने के लिए लोगों को शीघ्र व सुलभ तरीके से न्याय दिलाने का राल्सा द्वारा अथक प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि आॅन लाइन लोक अदालत का आयोजन विधिक सेवा कार्यक्रमों की क्रियान्विति के तहत ही किया जाता है। लोक अदालत के माध्यम से मुकदमे का निस्तारण होने से मुकदमे का हमेशा-हमेशा के लिए अंत हो जाता है क्योंकि आगे कोई अपील का प्रावधान नहीं है तथा लोक अदालत के माध्यम से प्रकरण का निस्तारण कराने पर कोर्ट फीस भी वापस मिल जाती है। लोक अदालत में प्रकरण निस्तारण कराने से अनावश्यक मुकदमेबाजी समाप्त होगी व समाज में शांति एवं सदाचार का माहौल कायम होगा।
आॅनलाइन समापन समारोह में उच्चतम न्यायालय के न्यायाधिपति श्री अजय रस्तोगी, न्यायाधिपति श्री दिनेश माहेश्वरी, राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति श्री इन्द्रजीत मोहन्ती, राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष न्यायाधिपति श्री संगीत राज लोढ़ा एवं उच्च न्यायालय के सभी न्यायाधिपति, नाल्सा व राज्य के पदाधिकारी एवं प्रदेश के जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों के अध्यक्ष एवं सचिव तथा न्यायिक अधिकारी उपस्थित थे।