किसान परंपरागत खेती के साथ-साथ मशरूम को व्यवसाय के रूप में अपनाकर अधिक लाभ कमा सकते हैं : डॉ. सुरेंद्र सिंह

ਪਿਛਲੇ 5 ਸਾਲਾਂ ਤੋਂ ਫ਼ਸਲਾਂ ਦੀ ਰਹਿੰਦ-ਖੂੰਹਦ ਨੂੰ ਅੱਗ ਨਾ ਲਗਾ ਕੇ ਫ਼ਸਲਾਂ ਦਾ ਲੈ ਰਹੇ ਹਨ ਚੰਗਾ ਝਾੜ

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चंडीगढ़, 20 अक्तूबर-  चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय,हिसार के सायना नेहवाल कृषि प्रौद्योगिकी प्रशिक्षण एवं शिक्षण संस्थान के सहायक निदेशक (बागवानी) डॉ. सुरेंद्र सिंह ने कहा कि किसान परंपरागत खेती के साथ-साथ मशरूम को व्यवसाय के रूप में अपनाकर अधिक से अधिक लाभ कमा सकते हैं तथा बेरोजगार युवक भी प्रशिक्षण के माध्यम से आधुनिक तकनीक सीखकर इसे आगे बढ़ा सकते हैं।
डॉ. सिंह आज ‘मशरूम उत्पादन की तकनीक’ विषय पर आयोजित तीन दिवसीय ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर हिसार में प्रशिक्षणार्थियों को संबोधित कर रहे थे।
डॉ. सुरेंद्र सिंह ने प्रशिक्षणार्थियों से आह्वान किया कि वे मशरूम उत्पादन की आधुनिक तकनीकों की जानकारी हासिल कर अपना खुद का व्यवसाय स्थापित कर सकते हैं और अधिक मुनाफा हासिल कर सकते हैं। इस ऑनलाइन प्रशिक्षण की संयोजक डॉ. पवित्रा कुमारी ने प्रशिक्षणार्थियों को मशरूम में मौजूद पोषक तत्वों व उनकी औषधीय महत्ता के बारे में जानकारी दी। पादप रोग विशेषज्ञ डॉ. रमेश चुघ ने जहां मशरूम की मार्केटिंग से संबंधित सुझाव दिए वहीं उन्होंने खुम्ब में होने वाली बिमारियों व कीड़े-मकोड़ों से बचाव के बारे में भी अवगत करवाया।