मुख्यमंत्री ने अमर शहीद भगत सिंह की जयंती पर किया नमन
सितम्बर 28
अमर शहीद भगत सिंह को भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के सबसे प्रभावशाली क्रांतिकारियों में से एक माना जाता है। भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर, 1907 को अविभाजित भारत के लायलपुर ज़िले के बंगा में हुआ था। उनका परिवार ग़दर पार्टी का समर्थक था। अमर शहीद भगत सिंह ने 5वीं तक की पढाई गांव में की और उसके बाद उनके पिता किशन सिंह ने दयानंद एंग्लो वैदिक हाई स्कूल, लाहौर में उनका दाखिला करवाया। बहुत ही छोटी उम्र में भगत सिंह, असहयोग आन्दोलन से जुड़ गए और बहुत ही बहादुरी से उन्होंने ब्रिटिश सेना को ललकारा। जलियांवाला बाग हत्याकांड ने भगत सिंह के मन पर गहरा प्रभाव डाला। भगत सिंह ने चंद्रशेखर आज़ाद के साथ मिलकर क्रांतिकारी संगठन तैयार किया। लाहौर षड़यंत्र मामले में भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरू को फांसी की सज़ा सुनाई गई और बटुकेश्वर दत्त को आजीवन कारावास दिया गया। भगत सिंह को 23 मार्च, 1931 की शाम सात बजे सुखदेव और राजगुरू के साथ फांसी पर लटका दिया गया। तीनों ने हँसते-हँसते देश के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया। अमर शहीद भगत सिंह एक अच्छे वक्ता, पाठक व लेखक भी थे। उन्होंने कई पत्र-पत्रिकाओं के लिए लिखा व संपादन भी किया। मुख्यमंत्री निवास पर सांसद खरगोन श्री गजेंद्र सिंह पटेल, पूर्व मंत्री श्री ओम प्रकाश धुर्वे, पूर्व विधायक श्री कल सिंह भाबर तथा श्री भगत सिंह नेताम ने भी अमर शहीद भगत सिंह के चित्र पर माल्यार्पण कर पुष्पांजलि अर्पित की।

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