राजकीय आईटीआई में लघु सौर ऊर्जा संयंत्र लगेंगे मुख्यमंत्री ने 15 करोड़ रूपए स्वीकृत किए

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जयपुर, 18 जून। प्रदेश भर में राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) के लिए भवनों के पर लघु सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जाएंगे। शुरूआत में 50 प्रतिशत संस्थानों में सोलर प्लांट लगाकर इनसे प्राप्त ऊर्जा के उपभोग से संस्थान के विद्युत व्यय में बचत का विश्लेषण कर शेष संस्थानों में भी संयंत्र लगाए जाएंगे। मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत ने इसके लिए आरसीवीईटी के फंड से 15 करोड़ रूपए की राशि स्वीकृत की है।
श्री गहलोत द्वारा स्वीकृत प्रस्ताव के अनुसार, कौशल नियोजन एवं उद्यमिता विभाग द्वारा इन नए सोलर प्लांट्स का आईटीआई के विद्यार्थियांे के लिए सौर ऊर्जा से संबंधित कोर्स के लिए प्रशिक्षण सुविधा के रूप में उपयोग किया जाएगा। जिन आईटीआई संस्थानों में सोलर पावर प्लांट्स लगाए जाएंगे, वहां विभाग द्वारा परम्परागत विद्युत उपभोग में मासिक, त्रैमासिक और वार्षिक आधार पर बचत का तथ्यात्मक विश्लेषण करवाया जाएगा।
प्रदेश के सभी 218 राजकीय आईटीआई में लगभग 5527 किलोवाट क्षमता के सोलर पावर प्लांट लगाने की योजना प्रस्तावित है। उक्त कार्य राजस्थान इलेक्ट्रोनिक एण्ड इन्स्टूमेंट्स लिमिटेड (रील) के माध्यम से कैपेक्स मॉडल के तहत कराए जाएंगे। इसमें प्लांट की स्थापना के लिए राशि का निवेश तथा वार्षिक रख-रखाव एवं साफ-सफाई का खर्च संबंधित राजकीय संस्थान अथवा विभाग द्वारा किया जाता है। प्लांट की स्थापना के बाद संस्थान में उपभोग से शेष रही बिजली का विद्युत वितरण कंपनी द्वारा निर्धारित दर पर क्रय किया जाता है। ऐसे में संबंधित आईटीआई को वर्ष में लगभग 70 से 100 दिन के शैक्षणिक अवकाश की अवधि में बिजली के खर्च में हुई बचत से अतिरिक्त पैसा मिल सकता है।
उल्लेखनीय है कि राज्य बजट में वित्तीय वर्ष 2021-22 तथा 2020-21 के दौरान विभिन्न जिलों में 14 आईटीआई खोलना प्रस्तावित किया गया है। साथ ही, 4 अन्य आईटीआई परिसरों में कौशल विकास केन्द स्थापित किए जाने हैं। इन सभी आईटीआई संस्थानों में नए भवनों के निर्माण के साथ-साथ लघु सौर ऊर्जा संयत्र स्थापित किए जाएंगे। इसके लिए भवन निर्माण की कार्यकारी एजेंसियों को सोलर प्लांट स्थापना के लिए राशि सीधे हस्तांतरित की जाएगी। इसी प्रकार, वित्तीय वर्ष 2018-19 से पूर्व घोषित आईटीआई संस्थानों, जिनके भवन का निर्माण कार्य प्रगतिरत है अथवा निर्माण कार्य के लिए भुगतान बकाया है, के लिए भी भवन निर्माण की कार्यकारी एजेंसियों को सोलर प्लांट के लिए राशि हस्तांतरित की जाएगी।
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