संजय टंडन ने शिमला ग्रामीण में सुनी पीएम की मन की बात, कहा कार्यक्रम ने पूरे देश को जोड़ा

Sorry, this news is not available in your requested language. Please see here.

शिमला, 29 जून 2025 
भाजपा शिमला ग्रामीण मंडल द्वारा प्रधानमंत्री मन की बात कार्यक्रम का आयोजन टूटू बजार में किया गया, जिसमें विशेष रूप से भाजपा के उपस्थित रहे। उनके साथ कांगड़ा संसदीय के सांसद डॉ राजीव भारद्वाज, प्रदेश उपाध्यक्ष संजीव कटवाल, शिमला ग्रामीण से प्रत्याशी रवि मेहता, प्रदेश मीडिया प्रभारी कर्ण नंदा, मंडल अध्यक्ष यशपाल, सुमन गर्ग, प्रमोद कुमार, ओम प्रकाश, राम लाल वर्मा, संदीप ठाकुर, ऋतु रघुवंशी, रोशन लाल, मनोज उपस्थित रहे।
संजय टंडन ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की मन की बात कार्यक्रम देश को जोड़ने वाला कार्यक्रम है। किस प्रकार से पीएम ने देश को जोड़ा वह अद्भभुत है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के योगा का संदेश देते हुए कहा कि सभी देशवासी इस समय योग की ऊर्जा और ‘अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस’ की स्मृतियों से भरे होंगे। इस बार भी 21 जून को देश-दुनिया के करोड़ों लोगों ने ‘अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस’ में हिस्सा लिया। आपको याद है, 10 साल पहले इसका प्रारंभ हुआ। अब 10 साल में ये सिलसिला हर साल पहले से भी ज्यादा भव्य बनता जा रहा है। ये इस बात का भी संकेत है कि ज्यादा से ज्यादा लोग अपने दैनिक जीवन में योग को अपना रहे हैं। हमने इस बार ‘योग दिवस’ की कितनी ही आकर्षक तस्वीरें देखी हैं। विशाखापत्तनम के समुद्र तट पर तीन लाख लोगों ने एक साथ योग किया। विशाखापत्तनम से ही एक और अद्भुत दृश्य सामने आया, दो हजार से ज्यादा आदिवासी छात्रों ने 108 मिनट तक 108 सूर्य नमस्कार किए। सोचिए, कितना अनुशासन, कितना समर्पण रहा होगा। हमारे नौसेना के जहाजों पर भी योग की भव्य झलक दिखी। तेलंगाना में तीन हजार दिव्यांग साथियों ने एक साथ योग शिविर में भाग लिया। उन्होंने दिखाया कि योग किस तरह सशक्तिकरण का माध्यम भी है।
प्रधानमंत्री ने विश्व पर्यावरण दिवस और पेड़ लगाने के महत्व पर भी जोर डाला, कई लोगों ने अपने आस-पास के उन साथियों के बारे में बताया जो अकेले ही पर्यावरण बचाने के लिए निकल पड़े थे और फिर उनके साथ पूरा समाज जुड़ गया। सबका यही योगदान, हमारी धरती के लिए बड़ी ताकत बन रहा है। पुणे के श्री रमेश खरमाले जी, उनके कार्यों को जानकर, आपको बहुत प्रेरणा मिलेगी। जब हफ्ते के अंत में लोग आराम करते हैं, तो रमेश जी और उनका परिवार कुदाल और फावड़ा लेकर निकल पड़ते हैं।