5 वर्ष तक परिवार से दूर रही बेटी कलिस्ता मुंडे को मिलाया जाएगा परिवार से, चेयरमैन उमेश चानना के प्रयासों से हुआ संभव, फूसगढ़ के एमडीडी बाल भवन में रह रही थी बेटी कलिस्ता

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करनाल 11 मई,2021 कोरोना महामारी के बीच जहां हम प्रतिदिन दुखद खबरें सुन रहे हैं वहीं करनाल में 15 वर्षीय लड़की कलिस्ता मुंडे जोकि पिछले 5 वर्ष से अपने परिवार से बिछड़कर फूसगढ़ स्थित एमडीडी बाल भवन में रह रही थी, के लिए खुशी भरी खबर आई है। जिला बाल कल्याण समिति करनाल के चेयरमैन उमेश चानना के प्रयासों से कलिस्ता के परिवार का पता चल गया है। यह जानकारी चेयरमैन उमेश चानना ने मंगलवार को फूसगढ़ स्थित एमडीडी बाल में पत्रकारों से बातचीत के दौरान दी।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2016 में कलिस्ता अपने चाचा के साथ करनाल आई थी और उसके चाचा इसे चाईल्ड लेबर में लगाकर फरार हो गए थे। इसके उपरांत जिला बाल कल्याण समिति ने 9 वर्षीय कलिस्ता को रेसक्यू कर बाल भवन में भेज दिया था। कईं बार कलिस्ता की काऊंसलिंग की गई, हाल ही में की गई काऊंसलिंग के दौरान कलिस्ता ने बताया कि वह हरमुंडा टोली की रहने वाली है। इंटरनेट पर गांव का नाम खोजने के बाद पता चला कि यह गांव झारखंड के लातिहार जिला में पड़ता है व नक्सल प्रभावित क्षेत्र है। वहां के एसपी से भी गांव के बारे में पुष्टि होने पर उन्होंने संबंधित थाना इंचार्ज से बच्ची कलिस्ता के परिवार का पता लगाने की बात कही। इसके बाद खुशी की बात यह रही कि थाना इंचार्ज भी हरमुंडा टोली के रहने वाले निकले और उन्होंने अविलम्ब कलिस्ता के परिवार का पता लगा लिया जिसके बाद वहां की पुलिस को कलिस्ता की 2016 वाली फोटो शेयर की गई और परिवार की पुष्टि होने पर माता जीरामुनि देवी और पिता धनेश मुंडे से कलिस्ता की बात करवाई गई। बात करने पर कलिस्ता की आंखों में खुशी के आंसू आ गए। चेयरमैन ने बताया कि जल्द ही कलिस्ता को उसके परिवार के पास भिजवाया जाएगा।
चेयरमैन उमेश चानना ने बताया कि जिला बाल कल्याण समिति का प्रयास है कि हर बच्चे को सुरक्षित वातावरण मिले और बाल संरक्षण संस्थाओं में आने के बाद बच्चा वहां एक परिवार की तरह रहे। इसके लिए बच्चों की बार-बार काऊंसलिंग की जाती है। काफी हद तक विश्वास जीतने के बाद बच्चा कुछ बताना शुरू करता है, कईं बार इस प्रक्रिया में काफी समय भी लग जाता है। कलिस्ता इसका उदाहरण है। उन्होंने बताया कि समिति द्वारा हर बच्चे का इंडीवियूजअल केयर प्लान बनाया जाता है और उनकी रूचि जानी जाती है। उन्होंने बताया कि कलिस्ता को भी सिलाई के क्षेत्र में महारत हासिल है और वह छटी कक्षा में पढ़ती है, प्रयास करेंगे कि स्पोंसरशिप योजना के तहत कलिस्ता की पढ़ाई जारी रहे।
इस मौके पर जिला बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष उमेश चानना ने कहा कि कोई भी बच्चा परिवार से न बिछड़े इसके लिए मिलकर प्रयास करने होंगे। बस या ट्रेन में अकेले जा रहे छोटे बच्चों से पूछना चाहिए कि वह कहां जा रहा है और कहां से आया है। यदि लगे कि वह परिवार से बिछड़ गया है तो इसकी सूचना 100 नम्बर पर या चाईल्ड हैल्पलाईन नम्बर 1098 पर अवश्य दें, ताकि बच्चे के साथ भविष्य में कोई आपराधिक घटना न घटे और उसे परिवार से मिलाया जा सके।
इस मौके पर उपस्थित एमडीडी बाल भवन के संचालक पीआर नाथ ने भी खुशी जाहिर की कि कलिस्ता 5 वर्ष तक एमडीडी बाल भवन परिवार का सदस्य रहने के बाद अपने घर वापिस जा रही है। हम सब उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हैं। उन्होंने कलिस्ता को सिलाई मशीन देने की भी बात कही।