लुधियाना, 27 दिसंबर:
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन जयराम गडकरी के अनुसार, ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (जीएनएसएस) आधारित बाधा रहित मुक्त प्रवाह टोलिंग जैसी नई प्रौद्योगिकियां के कार्यान्वयन पर सलाहकार सेवाएं प्रदान करने के लिए सलाहकार नियुक्त किया गया है।
मंत्री ने यह जानकारी हाल ही में समाप्त हुए राज्यसभा के शीतकालीन सत्र में लुधियाना से सांसद (राज्यसभा) संजीव अरोड़ा द्वारा सैटेलाइट द्वारा टोल के संचालन पर पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में दी। अरोड़ा ने पूछा था कि क्या सरकार यातायात संबंधी परेशानियों से बचने के लिए टोल को सैटेलाइट से संचालित करने की योजना बना रही है और यदि हां, तो इसे कब तक लागू किया जाएगा।
अरोड़ा ने आज यहां यह जानकारी देते हुए कहा कि वर्तमान में फास्टैग सुविधा मौजूद है, जो टोल प्लाजा पर लंबी कतार में इंतजार करने की समस्या का समाधान है। फास्टैग सुविधा ने टोल प्लाजा पर लगने वाले समय को काफी कम कर दिया है। इस सुविधा के बावजूद, यह देखा गया है कि कई लोगों को अभी भी तकनीकी समस्याओं के मामले में टोल पर रुकना पड़ता है। यही कारण है कि सरकार अब व्यवस्था को आसान बनाने के लिए एक और एडवांस तकनीक लाने जा रही है। इस एडवांस तकनीक को ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (जीएनएसएस) कहा जाता है। नई व्यवस्था से बैरियर खत्म होने से इंतजार का समय शून्य हो जाएगा।
सरकार की योजना पूरे देश में जीएनएसएस पर आधारित गेट-मुक्त प्लाजा स्थापित करने की है। उम्मीद है कि एक बार जीएनएसएस शुरू हो जाने के बाद टोल प्लाजा पर ट्रैफिक जाम की समस्या का समाधान हो जाएगा। जीएनएसएस पर आधारित गेट-फ्री प्लाजा बनने के बाद लोगों को प्लाजा पर रुकना नहीं पड़ेगा। जीएनएसएस एक इलेक्ट्रॉनिक रिसीवर या डिवाइस को `हाई प्रिसिशन’ के साथ अपनी `हाई लोकेशन’ निर्धारित करने की अनुमति देता है। यह प्रणाली लोंगीटिउड, लेटीटिउड और अल्टीटिउड के माध्यम से इसे निर्धारित करती है। यह नेविगेशन, स्थिति और ट्रैकिंग प्रदान करता है।

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