अध्यक्ष हरविंदर कल्याण ने प्राकृतिक खेती को समय की मांग बताया
चंडीगढ़, 18 मार्च 2026
हरियाणा विधानसभा के अध्यक्ष श्री हरविंदर कल्याण ने कहा कि विधानसभा के लिए यह एक विशेष अवसर है कि गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत जैसे प्रतिष्ठित व्यक्तित्व सदन में उपस्थित होकर प्राकृतिक खेती जैसे महत्वपूर्ण विषय पर अपने विचार साझा कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आचार्य देवव्रत का प्राकृतिक खेती के प्रति न केवल गहरा जुड़ाव है, बल्कि इस दिशा में उनका योगदान भी अत्यंत उल्लेखनीय रहा है। वे वर्षों से देशभर में प्राकृतिक खेती को जन-आंदोलन बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं और किसानों को प्रकृति के सिद्धांतों के अनुरूप खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
श्री हरविंदर कल्याण ने कहा कि हरियाणा एक कृषि प्रधान प्रदेश है, ऐसे में प्राकृतिक खेती का महत्व और भी बढ़ जाता है। राज्य के कई क्षेत्रों में भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है और धान-गेहूं आधारित खेती के कारण जल संसाधनों पर अत्यधिक दबाव पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि अब समय की मांग है कि प्राकृतिक खेती के माध्यम से मिट्टी, जल, पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य की रक्षा करते हुए एक संतुलित कृषि प्रणाली विकसित की जाए।
उन्होंने अपने गुजरात प्रवास का उल्लेख करते हुए बताया कि वहां विधानसभा अध्यक्ष शंकरभाई चौधरी के साथ उनकी विस्तृत चर्चा हुई। आचार्य देवव्रत द्वारा प्रस्तुत प्राकृतिक खेती के मॉडल और डॉक्यूमेंट्री को देखकर इस विषय की उपयोगिता को करीब से समझने का अवसर मिला। इसी दौरान उन्होंने राज्यपाल को हरियाणा विधानसभा में आमंत्रित किया, जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार किया।
श्री कल्याण ने कहा कि आज के व्याख्यान से सभी विधायकों को प्राकृतिक खेती के बारे में गहन जानकारी प्राप्त हुई है। कई सदस्यों ने रुचि के साथ अपने प्रश्न भी रखे, जिनका राज्यपाल महोदय ने विस्तार से उत्तर दिया।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जनप्रतिनिधियों के माध्यम से यह संदेश किसानों तक पहुंचेगा और वे समय की मांग के अनुरूप खेती में बदलाव लाते हुए प्राकृतिक खेती को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ेंगे। इससे कृषि क्षेत्र को मजबूती मिलेगी और विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।
इस अवसर पर नेता प्रतिपक्ष श्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने प्राकृतिक खेती को एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय बताते हुए कहा कि इसका संबंध केवल खान-पान से ही नहीं, बल्कि मानव स्वास्थ्य से भी है। उन्होंने चिंता जताई कि रासायनिक खेती के कारण बीमारियां बढ़ रही हैं और अब समय है कि प्रकृति के करीब लौटते हुए प्राकृतिक खेती को अपनाया जाए। साथ ही उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के साथ-साथ किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है, ताकि खेती लाभदायक बन सके और किसान इसे अपनाने के लिए प्रेरित हों।

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