भाजपा नेताओं ने तीन कृषि विधेयकों को समर्थन दे रहे किसानों का समर्थन किया
किसानों ने हजारों की संख्या में ट्रैक्टरों से पहुंच कर दिया उपायुक्त को धन्यवाद पत्र – कर्णदेव कंबोज पूर्व मंत्री
किसानों के ट्रैक्टर मार्च ने विपक्ष के मुंह पर लगाया ताला – वेदपाल
चंडीगढ़ /कुरुक्षेत्र, 24 सितंबर। किसानों की आय को दोगुणा करने की नीति के तहत केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन कृषि विधेयकों का समर्थन करके किसानों ने अपनी आवाज बुलंद की। बृहस्पतिवार को अलग-2 जगह से हजारों किसान ट्रैक्टरों पर सवार होकर सर्किट हाउस के पास रोड पर एकत्रित हुए। तीन कृषि विधेयकों का समर्थन करने वाले किसानों को समर्थन देते हुए भाजपा नेता भी किसानों के साथ ट्रैक्टरों पर रादौर, लाडवा, इंद्री व शाहबाद से कुरुक्षेत्र पहुंचे। पूर्व मंत्री कर्णदेव कंबोज, इन्द्री विधायक रामकुमार कश्यप, नीलोखेड़ी से पूर्व विधायक भगवान दास कबीर पंथी, लाडवा से पूर्व विधायक डॉ पवन सैनी स्वयं ट्रेक्टर चलाकर लघु सचिवालय पहुंचे। कुरुक्षेत्र से भाजपा जिला अध्यक्ष राजकुमार सैनी, पूर्व जिला अध्यक्ष धर्मवीर मिर्ज़ापुर, लीगल सैल के प्रदेश संयोजक धुम्मन सिंह किरमिच, विधायक पुत्र युवा नेता साहिल सुधा, गौरव बेदी, रविन्द्र सांगवान, सुशील राणा, विक्रम शर्मा, सुरेश भी पिपली से ट्रेक्टर पर पहुंचे। ट्रेक्टरों पर हजारों की संख्या में किसान इनके साथ लघु सचिवालय पहुंचे । मंत्री कर्णदेव कंबोज ने संबोधित करते हुए कहा इन 3 कृषि विधेयकों से किसानों को अपनी फसल बेचने की स्वतंत्रता होगी। अगर उसकी फसल का दाम MSP से अधिक बिकती है तो मंडी से बाहर बेच सकता है।
भाजपा के प्रदेश महामंत्री वेदपाल ने कहा इतनी भारी संख्या में किसानों ने लघु सचिवालय पहुंचकर विपक्षी पार्टियों के मुंह पर ताला लगाने का काम किया। उन्होंने कहा विपक्ष केवल किसानों को भ्रमित कर रहा है। कांग्रेस पार्टी मुद्दा विहीन है। लाडवा से पूर्व विधायक डॉ पवन सैनी ने कहा इन कृषि विधेयकों से हरियाणा प्रदेश व देश के किसान के घर खुशहाली आएगी । किसान को अपनी फसल बेचने की आज़ादी होगी। मंडियां पहले की तरह चलेगी। इंद्री से विधायक रामकुमार कश्यप ने कहा नरेंद्र मोदी किसानों की आय 2022 तक दोगुनी करना चाहते हैं। इसलिए किसानों के हितों की चिंता करते हैं। भाजपा के जिला अध्यक्ष राजकुमार सैनी ने इस ट्रेक्टर रैली में सभी आभार व्यक्त किया। जिला मुख्यालय स्थित लघु सचिवालय पहुंचे। किसानों ने कृषि विधेयकों के समर्थन में जिला उपायुक्त के माध्यम से माननीय प्रधानमंत्री के नाम प्रेषित ज्ञापन सौंपा।
किसानों का कहना है कि विधेयकों को कानूनी रूप मिलने से उनको अपनी फसल ,अपनी मर्जी के भावों पर देश भर में किसी भी स्थान पर बिना किसी लाग लपेट के बेचने की आजादी मिल गई । यह बात किसानों के नाम पर राजनीति करने वाले को हजम नहीं हो रही है। किसानों ने कहा कि सरकार ने मंडी और न्यूनतम समर्थन मूल्य व्यवस्था बहाल रखने की बात कहकर किसानों के हित में निर्णय लिया है। आपने इन कानूनों में अनुबंध खेती के अच्छे नियम बनाकर हम किसानों को सुरक्षित किया है और रजिस्ट्री में सभी नियमों का सारा लेखा-जोखा होगा जिससे अनुबंध करने वाला व्यवसायी अपनी शर्तों से भाग नहीं सकेगा कोई भी व्यवसायी अनुबंध खेती की आड़ में किसानों की जमीन नहीं ले सकेगा और न ही एक बार अधिक धन देकर उसको चुकाने की एवज में हम से बंधुआ खेती करा सकेगा। अगर कोई व्यवसायी हमारे खेत में ट्यूबवेल, पोली हाउस जैसे ढांचा खड़ा करता है और वह अनुबंध के बाद निश्चित समय के अंदर उसे नहीं हटाता है, तो किसान उसका मालिक होगा। आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कृषि व्यापार को फलने फूलने की जो छूट दी। दामों पर प्रतिबंध लगाकर कालाबाजारी रोकने व उपभोक्ता को सुरक्षित करने का काम किया है व मुख्यमंत्री मनोहर लाल द्वारा मंडी फीस 4% से घटाकर 1% करने पर हरियाणा के व्यापारी वर्ग को जो राहत दी है इसके लिए हम आप का धन्यवाद करते है। अब किसान सरकार के साथ हैं। किसानों ने कहा कि कुछ लोग नहीं चाहते कि किसानों को आर्थिक आजादी मिलें। ऐसे ही लोग व राजनीतिक दल इनका विरोध कर रहे हैं। लेकिन अब किसान कृषि विधेयकों को लेकर जागरूक हो चुके हैं।
किशनपुरा से आए बरखा राम ने कहा कि अब किसान अनपढ़ नहीं हैं। हमारे बच्चे इंटरनेट पर देख सकते व जानकारी ले सकते हैं कि कृषि अध्यादेश जो अब विधेयक बन चुके है, क्या हैं, किसके हित में हैं। खरकाली से आए किसान अशोक कुमार ने कहा कि कृषि विधेयक सभी के सामने हैं, सभी पढ़ सकते हैं, लेकिन कुछ नेता किसानों को अब भी भोला समझकर बहकाने का प्रयास कर रहे हैं। बहकाने का जमाना पीछे रह गया है, अब किसान जानता है कि उसका हित कहां हैं। सभी फैक्ट्री मालिक, व्यापारी आदि अपने सामान का भाव खुद तय करते हैं, अपनी मर्जी से बेचते हैं जहा उनको अपने सामान का अच्छा भाव मिले , फिर किसान को अपनी फसल बेचने का यह हक क्यों नहीं मिल रहा है। पहले नेता लोग कहते थे कि आपको अपनी फसल के भाव तय करने का हक मिलना चाहिए, अब मोदी सरकार यह हक किसानों दे रही है तो इसमें कुछ राजनीतिक दल अड़चन क्यों डाल रहे हैं। यह समझ से बाहर है। बपदा से राजपाल, धर्मवीर बरोट और संघोला से तिलक राज ज्ञापन देने पंहुचे किसान कहते हैं कि आर्थिक आजादी में नेताओं द्वारा अड़चन डालना ठीक नहीं है। युवा किसान जसविन्द्र बहादुर पुरा ने कहा कि किसानों के नाम पर राजनीति नहीं होनी चाहिए, किसान अपनी मेहनत के दम पर देश के लिए अनाज पैदा करता है। सभी राजनीतिक दलों को किसानों को मिल रही आर्थिक आजादी में अपना सहयोग करना चाहिए।

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