गुरबाणी का अमृत ही मानवता की रक्षा कर सकता है : प्रो. जगबीर सिंह

पंजाबी डिपार्टमेंट, दिल्ली विश्वविद्यालयद्ध
नई दिल्ली, 30 july 
हिन्दुस्थान के लोकप्रिय प्रधनमंत्राी मानयोग श्री नरेन्द्र मोदी जी की सरकार के नेतृत्व में-इन्दिरा गांध्ी राष्ट्रीय कला केन्द्र के सदस्य सचिव श्री सच्चिदानन्द जोशी तथा उनके वरिष्ठ सहयोगियों के द्वारा श्री गुरु नानकदेव जी के 550वें प्रकाश पर्व वर्ष को समर्पित वैबिनारों की लड़ी में आह्वान करते हुए प्रो. जगबीर सिंह जी ने कहा कि आज का सारा संसार आपसी ईष्र्या, द्वेष, यु( के कगार पर खड़ा दिखाई दे रहा है। लगता है कि किसी भी क्षण विश्व की सर्वोच्च शक्तियां आपस में टकराकर मानवता का संहार करवाने में पीछे नहीं रहंेगी। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में श्री गुरुग्रंथ साहिब की वाणी में मानवता के प्रति सांझीवालता का संदेश ही विश्व में गुरबाणी का अमृत पिलाकर मानवता की रक्षा कर सकता है।
अनेक धर्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक, विश्वविद्यालयों द्वारा सहयोग देते हुए श्री गुरुग्र्रंथ साहिब के सामाजिक समरसता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के प्रयास में राष्ट्रीय सिख संगत के राष्ट्रीय महामंत्राी संगठन श्री अविनाश जायसवाल जी ने उपस्थित प्रसि( विद्वानों की उपस्थिति में विनम्रतापूर्वक विचार सांझे करते हुए कहा कि श्री गुरु नानकदेव जी ने ‘हम नहीं चंगे बुरा नहीं कोए’ वाणी में जो हमें संदेश दिया है कि उसका अपने जीवन में अभ्यास करते हुए श्री गुरु नानकदेव जी के सपनों के भारत को विश्वगुरु बनाकर खड़ा करें।
डाॅ. बलतेज सिंह मान-सदस्य, राष्ट्रीय आयोग केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय-भारत सरकार ने वेबिनार में भाग लेने वाले विद्वानों से ‘सभी का सांझा गुरु नानक’ विषय पर अत्यंत सारगर्भित और तथ्यों पर आधरित विचारों की सांझ करते हुए कहा कि श्री गुरु नानकदेव जी ने अपने सम्पूर्ण जीवन में बिना भेदभाव किए छोटे-बडे़, ऊंच-नीच को बराबर का स्थान देकर, जो हमें रास्ता दिखाया, वह आज भी हमें आपस में स्नेह, प्यार, आदर, श्र(ा से रहने में सहायक है।
अध्यक्षता करते हुए राष्ट्रीय सिख संगत के सत्कारयोग राष्ट्रीय अध्यक्ष स. गुरचरन सिंह गिल ने श्री गुरु नानकदेव जी की रब्बी शिक्षाओं को कलियुग का जहाज बताते हुए कहा कि आज भी दुखी मानवता श्री गुरु नानकदेव जी की वाणी का अपने जीवन में अभ्यास करके सुखी जीवन व्यतीत कर सकती है। श्री गुरु नानकदेव जी ने जीवन के व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक, धर्मिक, राष्ट्रीय, वैज्ञानिक, मनोवैज्ञानिक पक्षों पर जो मार्गदर्शन किया है वो आज भी पूरी मानवता के लिए कल्याणकारी है।
राष्ट्रीय सिख संगत विदेश विभाग के समन्वयक तथा राष्ट्रीय महामंत्राी स. देवेन्दर सिंह साहनी ने श्री गुरु नानकदेव जी के प्रकाश पर्व से लेकर जो उस समय की कुरूतियों, भ्रमों से ग्रस्त भारत को अंध्कार से निकालकर प्रकाशमान किया उसकी जानकारी देते हुए कहा कि श्री गुरु नानकदेव जी ने अपनी उदासियों में एक बार पुनः हिन्दुस्थान के विचार और संस्कारों के आगे दुनिया को स्वीकार करने के लिए सबको सहर्ष तैयार किया।
इन्दिरा गांध्ी राष्ट्रीय कला केन्द्र के कंजर्वेशन डिवीजन के अध्किारी श्री अनिल वर्मा ने वैबिनार में उपस्थित विद्वानों तथा देश के कोने-कोने से भाग ले रहे सहभागियों का आभार प्रदर्शित करते हुए कहा कि जिस उत्साह से आप सब इन समागमों में तन-मन-ध्न से जुटे हुए है उसमें निश्चित ही इन्दिरा गांध्ी कला केेन्द्र के समस्त अध्किारीगण, सहयोगी, विशेषकर हमारे प्रेरणास्रोत सत्कारयोग डाॅ. सच्चिदानन्द जोशी श्री गुरु नानकदेव जी के संदेशों को आप सबके माध्यम से देश के कोने- कोने में पहुंचाकर एक स्वर्णिम इतिहास रचेंगे। मैं वाहिगुरु से अरदास करता हूं कि वो हमें शक्ति दे कि हम अपने प्रधनमंत्राी के सपनों को साकार करने में सपफल हों।