तूफानी हवाओं से बिजली के खंभों तथा लाइनों को क्षतिग्रस्त होने से बचाने के लिए किये जा रहे कई तरह के उपाय : रणजीत सिंह

Ranjit Singh minister

चंडीगढ़, 5 नवंबर- हरियाणा में तूफानी हवाओं के चलते बिजली के खंभों तथा लाइनों को क्षतिग्रस्त होने से बचाने के लिए कई तरह के उपाय किये जा रहे हैं ताकि बार-बार इनके क्षतिग्रस्त होने के कारण होने वाले आर्थिक नुकसान से बचा जा सके।

विद्युत तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री रणजीत सिंह ने यह जानकारी आज हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे भाग के पहले दिन विधायक डॉ0 अभय सिंह यादव द्वारा पूछे गए एक तारांकित प्रश्न के उत्तर में सदन को दी।

उन्होंने बताया कि उन्नत विशिष्टियों के साथ एलटी तथा 11 के.वी. लाइनों की नई कन्फिगे्रशन वितरित की गई है। खंभों को झुकने से बचाने के लिए ब्रेसिंग तथा बेल्टिंग के प्रावधान के साथ लाइन के हर आठवें खम्भे पर एच-पोल उपलब्ध करवाया जा रहा है। इसके अलावा, प्रत्येक चौथे पोल पर विंड स्टे भी उपलब्ध करवाई जा रही है। लाइन की उचित दूरी बनाए रखने तथा इसे झुकाव से बचाने के लिए वी-शेप या हॉरिजोंटल क्रास आम्र्स के लिए बे्रसिंग उपलब्ध करवाई जा रही है। खंभे लगाते समय बैकफिल की उचित रेमिंग भी सुनिश्चित की जा रही है।

श्री रणजीत सिंह ने बताया कि सितम्बर से नवम्बर तथा अप्रैल से जून माह तक कम लोड अवधि के दौरान विशेष अभियान के तहत बिजली लाइनों के रास्ते में आने वाले वृक्षों की टहनियों को काटा जाता है ताकि इनसे होने वाली दुर्घटनाओं से बचा जा सके। उन्होंने बताया कि मौजूदा लाइन को मजबूत करने, लम्बे स्पैन, झुके हुए खंभे, ढीले सैग, पेड़ों को छूने वाली लाइनों आदि की पहचान करने के लिए एक विस्तृत सर्वेक्षण किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड द्वारा बिजली लाइनों का अद्र्ध-वार्षिक, प्री-मानसून तथा हॉटलाइन अनुरक्षण किया जा रहा है और ईआरपी मॉड्यूल पर इसकी मॉनिटरिंग भी की जा रही है। उन्होंने बताया टॉवरों की वर्तमान डिजाइनिंग 170 किलोमीटर प्रति घंटे तक की निंरतर गति से चलने वाली हवाओं को सहन करने में सक्षम है। परंतु यह देखा गया है कि जब चक्रवात का रूप ले लेती हैं तो टॉवरों को घुमा या झुका देती हैं। निगम द्वारा इसके लिए उड़ीसा और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों, जो हर वर्ष चक्रवातीय तूफानों का सामना करते हैं, के साथ सम्पर्क किया जा रहा है ताकि हरियाणा में इन राज्यों की तर्ज पर प्रणाली लागू की जा सके।