पंजाब के बाग़बानी और मृदा एवं जल संरक्षण मंत्री राणा गुरजीत सिंह ने आज यहाँ सैक्टर 26 स्थित मैगसीपा संस्था में इजराइल के बाग़बानी माहिरों के साथ विचार-विमर्श के बाद बताया कि इजराइल में पानी के संसाधन नामात्र होने के बावजूद कम से कम पानी का प्रयोग करके अधिक से अधिक गुणवता भरपूर उपज पर ज़ोर दिया जा रहा है और बाग़बानी की नयी तकनीकें अपनाने में इजराइल विश्व भर में अग्रणीय है। उन्होंने कहा कि राज्य में इजराइल की तकनीक से चल रहे सैंटर बाग़बानी फसलों की क्वालिटी पैदावार में सहायक हो रहे हैं। इसलिए इस प्रौद्यौगिकी को बाग़बानी के क्षेत्र में बाकी फसलों के लिए भी लागूकरण के लिए विभाग द्वारा प्रयास किये जा रहे हैं।
बाग़बानी मंत्री ने कहा कि आज के समय जब हर देश पानी की क्वालिटी और पानी के घटते स्तर संबंधी चिंतित है और नयी तकनीकें अपना रहे हैं तो पंजाब भी नयी तकनीकें अपना के बाग़बानी क्षेत्र में आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों को नयी तकनीकों के प्रति जागरूक करने और अन्य ज्यादा लाभ प्राप्त करने पर ज़ोर दिया।
उन्होंने बताया कि खनौड़ा में फलों के काश्त सम्बन्धी इजराइल की उच्च तकनीक अपनाई जा रही है। इस सैंटर में 12 मीठे संगतरों और 8 नारंगी संगरतों की किस्मों को अलग अलग रूट स्टाक पर लगा कर तैयार किया जा रहा है। इस सैंटर में अब तक लगभग 1,50,000 किन्नू और अन्य नीबू जाति फलों के मानक किस्म के बीमारी रहित पौधे हाईटेक नरसरी में तैयार करके किसानों को मुहैया करवाए गए। इस सैंटर और अब तक लगभग 800 किसानों को बाग़बानी की नयी तकनीकों सम्बन्धी 32 ट्रेनिंगें दी जा चुकी हैं।
इजराइली बाग़बानी माहिर श्री याइर ऐशल ने कहा कि पंजाब और इजराइल बाग़बानी के क्षेत्र में पहले ही मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब में इंडो-इजराइल वर्क प्लान के अंतर्गत दो सैंटरज़ आफ एक्सीलेंस, सैंटर आफ एक्सीलेंस फार वैजीटेबलज़, करतारपुर, ज़िला जालंधर और सैंटर आफ एक्सीलेंस फार फ्रूटस (सिटरस), खनौड़ा, ज़िला होशियारपुर सफ़लतापूर्वक काम कर रहे हैं।
इस मौके पर श्रीमती सीमा जैन अतिरिक्त मुख्य सचिव (बाग़बानी), स. गगनदीप सिंह बराड़ सचिव बाग़बानी, श्री मनदीप बराड़ मैनेजिंग डायरैक्टर पंजाब कृषि उद्योग कोरर्पोशन, श्री राजेश वशिष्ठ मुख्य भूमि पाल, स. बलविन्दर सिंह सिद्धू कमिशनर कृषि पंजाब, श्रीमती शैलिन्दर कौर डायरैक्टर बाग़बानी पंजाब और बाग़बानी के साथ अलग-अलग फसलों के नोडल अफ़सर शामिल थे।

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