चंडीगढ़, 18 मार्च 2026
हरियाणा राइट टू सर्विस कमीशन ने एमएसएमई निदेशालय द्वारा संचालित ऑनलाइन पोर्टल की कार्यप्रणाली में सुधार की आवश्यकता जताते हुए विभाग को सेवा वितरण प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने कहा कि इस संबंध में पूर्व में भी कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए थे, जिन पर निरंतर सुधार की अपेक्षा की गई थी।
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि वर्ष 2025 में पारित आदेशों में भी यह उल्लेख किया गया था कि हरियाणा सरकार का एक प्रमुख विभाग उद्योगपतियों, विशेषकर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों से जुड़े मामलों के निपटारे के लिए सही सॉफ्टवेयर तक उपलब्ध नहीं करा पा रहा है। बताया गया कि निजी कंपनी के माध्यम से तैयार किए गए इस पोर्टल पर लाखों रुपये खर्च किए गए, इसके बावजूद स्वीकृत मामलों की जानकारी संबंधित अधिकारियों के लॉगिन में दिखाई नहीं देती, जिससे भुगतान प्रक्रिया प्रभावित होती है और आवेदकों को विभिन्न कार्यालयों और आयोग के पास जाना पड़ता है।
आयोग ने कहा कि पूर्व में दिए गए निर्देशों के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ। शिकायतकर्ता को सितंबर 2023 में पुनः खोले गए आवेदनों का लाभ अंततः वर्ष 2026 में प्राप्त हुआ। जबकि अधिसूचित सेवा के तहत इस प्रकार के मामलों का निपटारा 45 दिनों की निर्धारित समय-सीमा में किया जाना चाहिए। दो वर्ष से अधिक की देरी सेवा अधिकार अधिनियम की भावना के विपरीत है।
आयोग ने यह भी कहा कि पोर्टल की तकनीकी समस्याओं, नए पोर्टल में माइग्रेशन तथा डैशबोर्ड पर मामलों के दिखाई न देने जैसी दलीलों को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया जा सकता। विभाग पर यह जिम्मेदारी है कि वह प्रभावी निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित करे ताकि किसी भी वास्तविक आवेदक को वर्षों तक प्रतीक्षा न करनी पड़े। ऐसी घटनाएं न केवल आवेदकों को कठिनाई में डालती हैं, बल्कि सेवा वितरण प्रणाली और राज्य के ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ वातावरण पर भी नकारात्मक प्रभाव डालती हैं।
मामले में सेवा वितरण में हुई देरी को पूरी तरह अनुचित मानते हुए आयोग ने अधिनियम की धारा 17(1)(ह) के तहत महानिदेशक, एमएसएमई को निर्देश दिए हैं कि शिकायतकर्ता को दोनों मामलों में 5,000-5,000 रुपये, कुल 10,000 रुपये का मुआवजा प्रदान किया जाए। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि महानिदेशक इस राशि की वसूली उस अधिकारी या संबंधित इकाई से कर सकते हैं जिसे सेवा में देरी के लिए जिम्मेदार पाया जाए।
आयोग ने महानिदेशक, एमएसएमई को निर्देश दिए हैं कि निजी कंपनी एम/एस वी-एक्सेल द्वारा विकसित पोर्टल की कार्यप्रणाली में तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए जाएं तथा ऐसी निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए जिससे किसी भी आवेदन के पोर्टल पर दिखाई न देने या तकनीकी कारणों से लंबित रहने की स्थिति उत्पन्न न हो। इस संबंध में की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट 15 अप्रैल 2026 तक आयोग को भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
आयोग के इन आदेशों की प्रतिलिपि उद्योग एवं वाणिज्य विभाग, हरियाणा के आयुक्त एवं सचिव को भी आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई है। आयोग ने आदेश के साथ ही इस शिकायत का निपटारा कर दिया है।

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