मुख्यमंत्री भाजपा में शामिल हुए सांसदों को वापिस बुलाने के लिए राष्ट्रपति से मिलने का समय मांगकर राजनीतिक नौटंकी में लिप्त: शिरोमणी अकाली दल

कहा कि सांसदों के खिलाफ कार्रवाई करना राष्ट्रपति के विवेकाधिकार में न आकर संसद के अधिकार क्षेत्र में आता है: डाॅ. दलजीत सिंह  चीमा

चंडीगढ़, 25 अप्रैल 2026

शिरोमणी अकाली दल ने भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए पार्टी के राज्यसभा सांसदों को वापिस बुलाने के लिए राष्ट्रपति से मिलने का समय मांगने के पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के फैसले को राजनीतिक नाटकबाजी करार दिया । उन्हें याद दिलाया कि अनुसूची के तहत सांसदों के खिलाफ कार्रवाई करना राष्ट्रपति के विवेकाधिकार में न आकर संसद के अधिकार का क्षेत्र है ।

यहां एक प्रेस बयान जारी करते हुए पार्टी के वरिष्ठ नेता डाॅ. दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि दलबदल विरोधी कानून साफ है कि यदि किसी विशेष पार्टी के दो तिहाई मैंबर किसी अन्य पार्टी में चले जाते हैं तो उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नही की जा सकती।

मुख्यमंत्री को यह बताते हुए कि उन्हें इस मुददे पर कोई उच्च नैतिक रूख लेने का कोई अधिकार नही है, डाॅ. चीमा ने याद दिलाया कि उन्होने अकाली दल के तीन विधायकों में से एक को आप में शामिल करने की मंजूरी दी थी और यहां तक कि उस विधायक को एक सार्वजनिक क्षेत्र का चेयरमैन भी नियुक्त किया था।

वरिष्ठ अकाली नेता ने कहा कि आम आदमी पार्टी को संवैधानिक रूप से मौजूद  नही होने वाले उपायों के बारे तलाश करने से पहले यह बताना चाहिए कि उसने पंजाब के असली ‘‘ आम आदमी’’ प्रतिनिधियों के बजाय राज्यसभा में अति अमीर बाहरी लोगों को क्यों नामित किया?  डाॅ. चीमा ने पूछा,‘‘ उन्हें लोगों को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि यदि जवाबदेही सिद्धांत है तो क्या नागरिकों को उन विधायकों को वापिस बुलाने का अधिकार है जिन्होने उन्हें विफल कर दिया है, यां आपकी जवाबदेही सिर्फ चयनात्मक है?’’

डाॅ. चीमा ने कहा कि दिल्ली में प्रतीकात्मक याचिकाओं का सहारा लेने के बजाय आम आदमी पार्टी को पंजाब की जनता का सामना करना चाहिए। उन्होने आगे कहा,‘‘ अगर पार्टी वास्तव में लोकतांत्रिक नैतिकता में विश्वास रखती है तो उसे पंजाब के लोकसभा भवन जाकर राज्यपाल से नए जनादेश का अनुरोध करना चाहिए। उन्होने कहा कि केवल इसी तरीके से पार्टी में जनता का विश्वास बहाल हो सकता है, संवैधानिक दिखावे से यह बिल्कूल संभव नही है।’’