कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने धान के न्युनतम समर्थन मूल्य में की गई मामूली वृद्धि को अपर्याप्त बताते हुये रद्द किया

केंद्र सरकार कोविड के संकट के दरमियान भी कजऱ्े के बोझ तले दबे किसानों की मुश्किलें दूर करने में नाकाम रही
चंडीगढ़, 1 जून:
कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने केंद्र सरकार की तरफ से धान के न्युनतम समर्थन मूल्य के ऐलान की गई वृद्धि को अपर्याप्त बताते हुये रद्द कर दिया। उन्होंने कहा कि कोविड के संकट के दरमियान भी किसानों को पेश गंभीर मुश्किलें दूर करने में भारत सरकार पूरी तरह नाकाम रही है।
कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने धान के न्युनतम समर्थन मूल्य में प्रति क्विंटल 53 रुपए के मामूली इजाफे को शर्मनाक बताते हुए अनुचित करार दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि कजऱ्े के बोझ और दुखों -तकलीफ़ों से जूझ रही किसानी इस अनिर्धारित समय में उनका हाथ थामने के लिए केंद्र सरकार की तरफ देख रही थी परन्तु केंद्र ने किसानों की अति अपेक्षित मदद करने से एक बार फिर टालमटोल कर दिया।
कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि खेती लागतें बढऩे से ख़ास तौर पर मज़दूर की कीमतों में विस्तार होने के एवज़ में किसानों को मुआवज़ा देना तो दूर की बात रही अपितु भाव में किया गया विस्तार मार्च और अप्रैल में बेमौसमी बारिशों से उनकी फसलों के हुए नुकसान की भरपायी करने पर भी पूरा नहीं उतरता।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों के लिए कोई भी विशेष पैकेज लेकर नहीं आई और न ही इसने मंडियों में क्रमवार गेहूँ लाने के लिए रियायत देने या धान की पराली के प्रबंधन के लिए 100 रुपए प्रति क्विंटल बोनस देने संबंधी राज्य सरकार की तरफ से उठाई माँग को स्वीकृत किया।
कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि कोविड महामारी के कारण भारी मुश्किलों के बावजूद पंजाब के किसानों की तरफ से बड़े पैमाने पर रबी की फ़सल और खरीद प्रक्रिया को सफलता से मुकम्मल करने को यकीनी बनाया गया है जिससे संकट के इस समय के दरमियान देश को अति अपेक्षित खाद्य सुरक्षा एक बार फिर मुहैया करवाई जा सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके बदले किसान अपना बनता हक चाहते हैं, दान नहीं और क्या भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार इसी तरह उनकी जायज माँगों और ज़रूरतों को अनदेखा करना जारी रखेगी।
कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने याद करवाया कि पिछले महीने उन्होंने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में धान का न्युनतम समर्थन मूल्य 2902 रुपए प्रति क्विंटल तक बढ़ाने के लिए अपील की थी जिससे उल्ट जाते हुए केंद्र सरकार की तरफ केवल 1868 रुपए प्रति क्विंटल का न्युतनम समर्थन मूल्य घोषित किया गया है। उन्होंने केंद्र को इस फ़ैसले की समीक्षा करने की अपील की और बड़े सहायता पैकेज लाने के लिए कहा जिसमें न्युतनम समर्थन मूल्य में विस्तार, पराली को जलाये जाने से रोकने के लिए वित्तीय रियायतें, फ़सलीय नुकसान और अंतरालिक गेहूँ खरीद प्रक्रिया के लिए मुआवज़ा शामिल हो।