एडवोकेट जनरल को न्यायपालिका पर सवाल उठाने के लिए मुख्यमंत्री को आपराधिक नोटिस जारी करना चाहिए: सरदार  बिक्रम सिंह मजीठिया

चंडीगढ़/17अक्टूबर: 

शिरोमणी अकाली दल के वरिष्ठ नेता सरदार बिक्रम सिंह मजीठिया ने आज राज्य के एडवोकेट जनरल से कहा है कि पीएसीएस(न्यायिक) परीक्षा पर जोर देकर न्यायपालिका पर संदेह जताने के लिए वह मुख्यमंत्री भगवंत मान पर स्वतः अवमानना नोटिस जारी किया जाना चाहिए। उन्होने कहा कि पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय की देखरेख में आयोजित होने वाली परीक्षा इतिहास में पहली बार पारदर्शी तरीके से आयोजित की गई थी।

यहां एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए वरिष्ठ अकाली नेता ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि मुख्यमंत्री पहले उच्च न्यायालय पर पीसीएस(ज्यूडिशियल) का पेपर पारदर्शी तरीके से नही कराने का आरोप लगाया था। उन्होने कहा,‘‘ चूंकि संविधान के अनुच्छेद 234 के अुनसार उच्च न्यायालय पीसीएस परीक्षा का अधिकार क्षेत्र का उपयोग करता है, इसीलिए मुख्यमंत्री ने अदालत की ईमानदारी पर संदेह जताया इसीलिए उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना कार्यवाही शुरू की जानी चाहिए। उन्होने कहा कि यदि एडवोकेट जनरल इस जिम्मेदारी को पूरा नही करते हैं तो अकाली दल उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के पास जाएगा और कानून के अनुसार मुख्यमंत्री के खिलाफ कार्रवाई की मांग करेगा।

सरदार मजीठिया ने यह  भी बताया कि कैसे आम आदमी पार्टी (आप) सरकार उच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन नही कर रही  और राज्य में अवैध खनन व्यापार के पीछे के सरगनाओं के खिलाफ कार्रवाई नही कर रही है। उन्होने कहा कि रोपड़ में शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस के कहने पर हो रहे अवैध खनन के खिलाफ आवेदन किए जाने के बावजूद एसएसपी विवेक सोनी इस मामले में कोई कार्रवाई नही कर रहे हैं। उन्होने कहा कि हालात इस कदर बिगड़ गए हैं कि ट्रक यूनियन के अध्यक्ष बीर सिंह और उनके रिश्तेदार नाज्जर सिंह पर कल सिर्फ इसीलिए हमला किया गया, क्योंकि उन्होने मंत्री  द्वारा किए जा रहे अवैध खनन का विरोध किया था। उन्होने कहा कि पीड़ितो की आस्था की वस्तुओं का भी अपमान किया गया था।

इस बात पर जोर देते हुए रोपड़ के एसएसपी इस व्यापार के सरगनाओं के खिलाफ कार्रवाई न करने के लिए उच्च न्यायालय से फटकार मिलने के बावजूद अवैध खन्न के खिलाफ कार्रवाई करने से इंकार कर रहे थे। उन्होने एक उदाहरण देते हुए बताया कि न्यू सतलुज स्टोन क्रशर के खिलाफ मामला दर्ज होने के बावजूद कैसे इसके मालिकों को अज्ञात दिखाया गया है। उन्होने वीडियो भी दिखाया कि कैसे अवैध खनन करने वालों द्वारा जंगल की जमीन में गडढ़े बनाए गए और कहा कि हरजोत बैंस के चाचा बचितर बैंस रोपड़ में बड़े पैमाने पर अवैध खनन में लिप्त थे।

सरदार मजीठिया ने उस तरीके की भी निष्पक्ष जांच की मांग की , जिसमें एम.के होटल का प्रदूषण , उत्पाद शुल्क अधिनियम और यहां तक कि भोजन की गुणवत्ता से संबधित नोटिस भेजे गए , क्योंकि इसके प्रबंधन ने तीन मंत्रियों से होटल के एक कमरे में ‘कुल्चा छोले’ खाकर इसका भुगतान मांगा  था। उन्होने कहा कि यह बेहद हैरानी की बात है आम आदमी के मंत्रियों ने होटल के सामने कुल्चे वाले के सामने जमीन पर कुल्चा खाना उचित नही समझा, लेकिन उसे होटल में ले गए और कमरे को किराया दिए बिना एक निजी कमरे में खाना चाहते थे। उन्होने कहा कि यह बेहद निंदनीय है कि तीन मंत्रियों-हरपाल चीमा , मीत हेयर, अमन अरोड़ा ने अपना प्रभाव इस्तेमाल करते हुए होटल मालिक को बार-बार नोटिस देकर परेशान किया, जिससे मालिक को उसके खिलाफ अवैध कार्यवाही पर रोक लगाने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाने के लिए मजबूर होना पड़ा।

अकाली नेता ने आप सरकार से यह भी सवाल किया कि वह पंजाब उत्पाद शुल्क घोटाले में उनकी भूमिका के लिए आईएएस अधिकारियों केपी सिन्हा और वरूण रूजम के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए सीबीआई को अनुमति क्यों नही दे रहे हैं। उन्होेने कहा, ‘‘ सरकार जानती है कि एक बार इन अधिकारियों पर मुकदमा चलाया गया तो घोटाले में आप के शीर्ष लीडरशीप की भूमिका उजागर हो जाएगी’’।