शिरोमणी अकाली दल ने जंतर-मंतर पर बंदी सिंहों की रिहाई की मांग और केजरीवाल से प्रो. दविंदरपाल सिंह भुल्लर की रिहाई के आदेश पर हस्ताक्षर करने की मांग को लेकर धरना दिया

कहा कि पार्टी सिख समुदाय के लिए न्याय सुनिश्चित करने और पंजाब के सभी लंबित मुददों के समाधान की मांग के लिए केंद्र सरकार का सामना करने के लिए तैयार: सरदार सुखबीर सिंह बादल

अकाली दल के धरने में शिअद(दिल्ली) के अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना और जागो पार्टी के नेता मनजीत सिंह जीके शामिल हुए

 

चंडीगढ़/20जुलाई: शिरोमणी अकाली दल(शिअद) ने आदेश भर की जेलों में बंद सभी सिख बंदियों को उम्रकैद की सजा पूरी होने के बाद उनकी तत्काल रिहाई तथा इसके अलावा मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से प्रो. दविंदरपाल सिंह भुल्लर की रिहाई के आदेश की फाईल जो सात महीने से उनके डेस्क पर पड़ी हुई ,पर हस्ताक्षर करने की मांग को लेकर (दिल्ली)जंतर-मंतर पर धरना दिया ।

अकाली दल के अध्यक्ष सरदार सुखबीर सिंह बादल ने धरने की अगुवाई की, जिसके दौरान यू टयूब पर प्रतिबंधित किए गए ‘रिहाई’ गीत बजाया गया, अकाली दल अध्यक्ष ने जोर देकर कहा कि पार्टी सिख समुदाय के लिए न्याय के साथ साथ पंजाब के सभी लंबित मुददों के समाधान की मांग के लिए केंद्र सरकार का सामना करने के लिए तैयार है।

यह धरना, जिसमें अकाली दल के वरिष्ठ नेतृत्व ने भाग लिया, को शिरोमणी अकाली दल (दिल्ली) और जागो पार्टी से भी समर्थन मिला, उनके अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना और मंजीत सिंह जीके ने सभी बंदी सिंहों की रिहाई के लिए एकजुटता व्यक्त की।

इस अवसर पर एक भावुक भाषण में सरदार सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि सिख समुदाय अकाली दल के साथ खड़ा है और सिख बंदियों के साथ मानवाधिकारों का उल्लंघन को समाप्त करने की मांग कर रहा है, जो अपनी उम्रकैद की सजा पूरी होने के बाद भी देश भर की विभिन्न जेलों में बंद हैं। ‘‘ हम उनकी उम्रकैद की सजा को कम करने की मांग नही कर रहे, लेकिन केंद्र सरकार से भाई बंलवंत सिंह राजोआणा की मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदलने और श्री गुरु नानक देव जी के 550 वें प्रकाशोत्सव के अवसर पर अपनी आजीवन कारावास की सजा काट चुके आठ सिख बंदियों की रिहाई के लिए अपनी राष्ट्रीय प्रतिबद्धता को पूरा करने की मांग कर रहे हैं’’।

यह कहते हुए कि सिख बंदियों को छोड़ दिया जाना चाहिए, सरदार बादल ने कहा , ‘‘ वे श्री दरबार साहिब पर हमले और 1984 में सिखों के कत्लेआम के बाद भावना में बह गए थे । वे अपनी उम्रकैद की सजा काट चुके हैं’’।

इस अवसर पर अकाली दल अध्यक्ष ने चुनौती के एक संकेत के रूप में कंवर ग्रेवाल के रिहाई गीत ‘तुसी साडी कौम दे खिलाफ चल रहे हो, जी पैरां हथ लेके इंसाफ चल रहे हो’ का छंद भी गाया। यह कहते हुए कि कंवर ग्रेवाल ने केवल सिख समुदाय की भावनाओं को व्यक्त किया था। सरदार बादल ने कहा, ‘‘ हमने कभी भी राजशाही की आकांक्षा नही की और इसके बजाय हमने हमेशा गुरु साहिबान के समय और पंजाबियों और विभाजन के बाद देश पर अत्याचार और उत्पीड़न से लड़ते हुए खुद को बलिदान किया है। उन्होने एमरजेंसी के विरोध प्रदर्शन के अलावा सूबा मोर्चा और धर्म युद्ध सहित अकाली दल की अगुवाई में विभिन्न ‘मोर्चों ’ का उदाहरण भी दिया, यहां तक कि उन्होने कहा कि यह आंदोलन सत्ता हासिल करने के लिए नही बल्कि पंजाबियों की आवाज बुलंद करने के लिए किए गए थ। हम ऐसा करते रहेंगें और बंदी सिंहों की रिहाई सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं’’।

सरदार बादल ने दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार और उसके मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवपाल को प्रो. दविंदरपाल सिंह भुल्लर की रिहाई के आदेशों पर हस्ताक्षर न करने के लिए भी निंदा की , जो सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद भी सात महीने से उनकी मेज पर पड़ी हुई है।

सरदार बादल ने पंजाबियों से स. परमजीत सिंह सरना और मंजीत सिंह जीके का स्वागत करते हुए सभी पंजाबियों से एक झंडे के नीचे एकजुट होने का आग्रह किया तथा कहा कि अकाली दल को कमजोर करने की साजिशें रची जा रही हैं। उन्होने संगरूर के सांसद सिमरनजीत सिंह मान को सार्वजनिक मंचों पर खालिस्तान की मांग करने के लिए निंदा की , लेकिन देश की एकता और अखंडता के नाम पर ससंद में स्पीकर्स चैंबर में शपथ लेने के लिए आवेदन करने के लिए भी निंदा की।

अकाली दल , केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को एक मेमोंरेंडम सौंपेगा, जिसमें भाई बंलवंत सिंह राजोआणा के अलावा जेल में बंद सभी सिख बंदियों को उनकी जेल की अवधि पूरी होने के बाद भी जेल की सजा काट रहे बंदियों को रिहा करने और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को रिहाई के प्रो. दविंदरपाल सिंह भुल्लर की रिहाई के आदेश पर हस्ताक्षर करने की मांग की जाएगी।

 

इस धरने में अकाली दल अध्यक्ष सरदार सुखबीर सिंह बादल के अलावा सरदार बलविंदर सिंह भूंदड़, सरदार हरजिंदर सिंह धामी, बीबा हरसिमरत कौर बादल, स. अवतार सिंह हित, प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा, बीबी जागीर कौर, स. हीरा सिंह गाबड़िया, स. परमजीत सिंह सरना,स. हरविंदर सिंह सरना, स. मनजीत सिंह जीके, डॉ. दलजीत सिंह चीमा, स. जगमीत सिंह बराड़, स. परमजीत सिंह रोमाणा, डॉ. सुखविंदर सुक्खी, स. कवंरजीत सिंह रोजी बरकंदी, प्रो. विरसा सिंह वल्टोहा, स. सुरेंद्र सिंह ठेकेदार, स. गुरचरन सिंह ग्रेवाल, स. तेजिंदर सिंह मिडडूखेड़ा, स. राजिंदर सिंह मेहता, स. सुखविंदर सिंह बब्बर, बीबी रंजीत कौर, स. मंतर सिंह बराड़, स.वरदेव सिंह नोनी मान, स. शरनजीत सिंह सोठा, स. चरनजीत सिंह बराड़, स. हरदीप सिंह बुटरेला, स. चरनजीत सिंह कालेवाल, स. गुरइकबाल सिंह महल, स. रविंदर सिंह ब्रहमपुरा, स. रंजीत सिंह ढ़िल्लों, स. तलबीर सिंह गिल, स. हरप्रीत सिंह कोटभाई, जसपाल सिंह बिटटू झठा स. बलकार सिंह बराड़, बीबी सुनीता चौधरी, स. राजनबीर सिंह घुमाण, स. जोध सिंह समरा, स. कर्मबीर सिंह गोराया, भी मौजूद थे।

और पढ़ें:-
पटियाला में मंदिर के बाहर खालिस्तान समर्थकी पोस्टर चिपकाने वाले एस. एफ. जे से जुड़े दो व्यक्ति काबू