एसजीपीसी अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी और अकाली दल अध्यक्ष सरदार सुखबीर सिंह बादल ने आंनदपुर साहिब और तलवंडी साबों से श्री अकाल तख्त साहिब तक दो खालसा मार्च की अगुवाई की
सरदार सुखबीर सिंह बादल ने केंद्र ,कांग्रेस और आम आदमी पार्टी से एस.जी.पी.सी को तोड़ने की साजिश रचकर सीमावर्ती राज्य की शांति भंग न करने की अपील की
अमृतसर /07अक्टूबर: खालसा रोष मार्च आज श्री अकाल तख्त साहिब पर जाकर समापन हुआ, जो शिरोमणी गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष सरदार हरजिंदर सिंह धामी और अकाली दल के अध्यक्ष सरदार सुखबीर सिंह बादल की अगुवाई में हजारों पंजाबियों के साथ वाहेगुरु से एसजीपीसी को विभाजित कर सिख समुदाय को कमजोर करने की कोशिश कर रहे केंद्रीय और राज्य की ताकतों को हराने के लिए पंथ को बल प्रदान करने की अरदास की है।
श्री अकाल तख्त साहिब के प्रमुख ग्रंथी ज्ञानी मलकीत सिंह ने एसजीपीसी और अकाली नेताओं की उपस्थिति में सभी हलकों से आई हुई संगत की उपस्थिति में वाहेगुरु जी से अरदास की।
अरदास के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए अकाली दल अध्यक्ष सरदार सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि केंद्र सरकार के साथ साथ कांग्रेस के साथ साथ आम आदमी पार्टी सहित अन्य पार्टियां , हरियाणा गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी अधिनियम 2014 के हक में एक पार्टी बनकर एसजीपीसी को निशाना बना रहे हैं। उन्होने कहा कि श्री केशगढ़ साहिब और श्री दमदमा साहिब से एक साथ शुरू हुए खालसा रोष मार्च के दो रास्तों से हजारों की संख्या में सिखों ने भाग लेकर यह साबित कर दिया िकवे इस साजिश को किसी भी कीमत पर सफल नही होने देंगें।
शिरोमणी अकाली दल के अध्यक्ष ने केंद्र और अन्य पार्टियों से सीमावर्ती राज्य और उसके लोगों को परेशान न करने की अपील की, जिन्होने न केवल देश की सीमाओं की रक्षा के लिए अपनी जान न्यौछावर कर दी, बल्कि देश के अन्न भंडार में सबसे अधिक योगदान दिया है। उन्होने यह भी स्पष्ट किया कि अकाली दल गुरु साहिबान के सिद्धांतों के लिए प्रतिबद्ध है , ‘ जो सरबत के भले के लिए एकजुट खड़े हैं। ‘‘ अकाली दल एसजीपीसी के अधिकारों को सुरक्षित करने और सिख समुदाय के धार्मिक मामलों में सीधा हस्तक्षेप को रोकने के लिए प्रतिबद्ध है। हम शांति और साम्प्रदायिक सौहार्द्र कायम रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं’’।
सरदार सुखबीर सिंह बादल ने पंजाबियों से आग्रह किया कि वे अपने धार्मिक संगठनों के खिलाफ की गई साजिश के बारे में जागरूक हों, तथा कहा कि उनके धार्मिक संगठन ने पिछले 102 सालों से गुरुद्वारों को मंहतो के नियंत्रण से मुक्त करवाया था। ‘‘ हम एसजीपीसी को बनाने में अपने पूर्वजों के संघर्ष को बेकार नही जाने दे सकते और इसके अनूठी छवि को बनाए रखने के लिए लड़ेंगें ’’।
सरदार बादल ने मार्च को मिली जबरदस्त प्रतिक्रिया के लिए संगत का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह स्पष्ट है कि सिख समुदाय हरियाणा के लिए अलग गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी को जायज ठहराए जाने वाले फैसले तथा फूट डालो तथा राज करो की साजिश से बेहद दुखी तथा नाराज है।
इससे पहले सुबह एसजीपीसी अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी और सरदार सुखबीर सिंह बादल ने तख्त श्री केशगढ़ साहिब , श्री आनंदपुर साहिब और तख्त श्री दमदमा साहिब, तलवंडी साबों में दो तख्तों से दो खालसा रोष मार्च की एक शुरूआत करने से पहले अरदास की। एसजीपीसी के साथ हो रहे अन्याय पर अपनी पीड़ा व्यक्त करने के लिए तथा पंथ के साथ एकजुटता व्यक्त करने के लिए ‘केसरी’ झंडे लहराते हुए और काले झंडे लहराते हुए हजारों पंजाबियों ने दोनो मार्चों में भाग लिया। संगत ने ‘धर्म ते ढ़ाका होन नही देना’ , ‘देग तेग फतेह’ तथा ‘पंथ की जीत’ के नारे लगाए।
मार्च में भाग लेने वाले वरिष्ठ नेताओं में प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा, बलविंदर सिंह भूंदड़, बिक्रम सिंह मजीठिया, जनमेजा सिंह सेखों, बीबी जागीर कौर, डॉ दलजीत सिंह चीमा , सुरजीत सिंह रखड़ा, गुलजार सिंह रणीके, गोबिंद सिंह लोगों वाल, हीरा सिंह गाबड़िया, विरसा सिंह वल्टोहा के के अलावा जिलाध्यक्ष और पार्टी के नेताओं तथा पदाधिकारियों के अलावा हरियाणा से एसजीपीसी के सदस्य रघुजीत सिंह विर्क , हरभजन सिंह मसाणा, बलदेव सिंह कैमपुर और जगसीर सिंह मांगोआणा ने भी रोष मार्च में भाग लिया।

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