कहा बादलों का पत्र कृषि किसानों को किसान विरोधी बताने की जगह किसानों के साथ मजाक: हरपाल सिंह चीमा
आज भी भाजपा के लिए धड़कता है बादलों का दिल,अलग होना तो केवल दिखावा
चंडीगढ़,8 सितंबर 2021
शिरोणी अकाली दल (बादल) की ओर से संघर्ष कर रहे किसान संगठनों को लिखे पत्र की कड़ी आलोचना करते हुए आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के वरिष्ठ नेता व नेता प्रतिपक्ष हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि ‘बादलों का दिल आज भी भाजपा के लिए धड़कता है क्योंकि पत्र का हर शब्द तथा हर अर्थ किसानों की बजाय नरेंद्र मोदी की पैरवी करता है।’
पार्टी मुख्यालय से बुधवार को जारी बयान में हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि जो पत्र बादल परिवार की ओर से पूर्व लोकसभा सदस्य प्रो. प्रेम सिंह ने चंदूमाजरा द्वारा किसान संगठनों को भेजा है,उसमें कहीं भी कृषि कानून को काला कानून नहीं कहा गया है बल्कि पंजाब की मौजूदा स्थिति के लिए खुद किसानों पर ही कटाक्ष करते हुए उन्हें इसका जिम्मेदार ठहराया है।
पत्र में लिखी गई बातों को सफेद झूठ करार देते हुए चीमा ने कहा कि ”बादल परिवार तथा पार्टी ने किसानों के हक में केंद्र सरकार पर कई बार दबाव बनाया है” जैसी बातें किसी के भी गले नहीं उतर रही है।
उनके मुताबिक अध्यादेश पर हरसिमरत कौर बादल के हस्ताक्षर,सर्वदलीय बैठक में सुखबीर बादल की पैरवी और प्रकाश सिंह बादल के गुणगान के वीडियो को कोई नहीं भूल सकता। इसलिए किसानों के सवालों के जवाब भी सुखबीर सिंह बादल, हरसिमरत कौर बादल तथा प्रकाश सिंह बादल खुद देना चाहिए, न कि प्रो चंदूमाजरा सहित अन्य नेताओं को बलि का बकरा बनाना चाहिए ।
किसानों पर लगे आरोप-प्रत्यारोप को लेकर चीमा ने कहा कि बादल ने चिट्ठी में लिखा है पहले स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान, हमने (बादल) उम्मीद की थी कि आप (किसान) पंजाब सरकार से आप (किसान) चुनाव में जाने से रोकने की अपील करेंगे, लेकिन आपने ऐसा नहीं किया।” यह आपकी रणनीति का हिस्सा होगा।”
चीमा ने कहा कि पत्र में कहीं भी सरल और स्पष्ट शब्दों में यह नहीं कहा गया है कि अकाली दल (बादल) काले कृषि कानूनों का कड़ा विरोध करता है और ये कानून कृषि और देश के अन्नदाता के अस्तित्व के लिए खतरा हैं। इसके विपरीत, हरसिमरत कौर बादल के शब्द “वे किसानों को कृषि कानूनों की व्याख्या करने में विफल रहे हैं” को अस्पष्ट शब्दों में दोहराया गया है।
चीमा ने बादल के इस दावे का भी खंडन किया कि हरसिमरत बादल द्वारा मंत्री पद से इस्तीफे देने के कारण किसानों का संघर्ष राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध हुआ है। क्यों कि पत्र में कहा गया है, “केंद्रीय मंत्रालय से इस्तीफा देने से राष्ट्रीय स्तर पर किसानों के संघर्ष को गति मिली है।”
आप नेता ने कहा कि इस पत्र में फिर वह दोहरा रहे हैं कि उन्होंने सरकार में रहते हुए केंद्र सरकार को बहुत समझाया था कि सरकार किसानों को विश्वास में लिए बिना ऐसा कोई भी कानून पास न करे।
पत्र में लिखी शब्दावली से साफ होता है कि आज भी बादल एंड कंपनी घातक कृषि कानूनों के खिलाफ बोलने से परहेज कर रही है। वहीं यह भी सिद्ध होता है कि बादल परिवार एंड कंपनी खुद कॉरपोरेट सोच के संरक्षक हैं,मोदी भक्त हैं तथा भाजपा के साथ मिलकर वापस सत्ता हासिल करना चाहते हैं।
हरपाल सिंह चीमा ने आरोप लगाया कि दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी
के माध्यम से सिख संगत द्वारा संघर्षरत किसानों द्वारा की गई सेवा का बादल एंड कंपनी श्रेय लेने की कोशिश कर रही है, जिसका जिक्र पत्र में किया गया है।
उन्होंने मनजिंदर सिंह सिरसा से सवाल किया कि ‘‘सिख संगत को बताया जाए कि किसानों की सेवा दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने की थी या अकाली दल बादल ने की है?’’
किसानों द्वारा की जा रही रैलियों में बादलों से सवाल पूछने के मामले को शरारती तत्व के साथ जोड़ने की सोची समझी भाषा पत्र में पेश की गई है। पत्र में लिखा है “यह सच है कि लोगों को किसी भी राजनीतिक दल से सवाल पूछने का अधिकार है। लेकिन तरीका सही हो, इरादा सवाल का जवाब पाने का हो, शोर-शराबे और भीड़ के बीच कोई भी शरारती तत्व किसी भी पार्टी का मोहरा बनकर परेशानी का कारण बन सकता है।’’
हरपाल सिंह चीमा ने अकाली दल के नेताओं से अपील की है कि वे किसानों को गुमराह करने की कोशिश न करें,क्योंकि प्रकाश सिंह बादल,सुखबीर सिंह बादल तथा हरसिमरत कौर बादल द्वारा काले कृषि कानूनों का गुणगान करना इतिहास के पन्नों पर काले अक्षरों में दर्ज है।

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