चंडीगढ़, 19 दिसंबर:
पंजाबी के प्रसिद्ध कहानीकार किरपाल कज़ाक को उनके कहानी संग्रह अंतहीन के लिए साहित्य अकादमी पुरुस्कार मिलने पर बधाई देते हुए पंजाब के उच्च शिक्षा और भाषा मंत्री तृप्त राजिन्दर सिंह बाजवा ने कहा है कि यह पुरुस्कार मिलने से न सिफऱ् किरपाल कज़ाक बल्कि पंजाबी बोली और पंजाबी जगत का मान बढ़ा है।
श्री बाजवा ने किरपाल कज़ाक को पंजाबी का समर्थ और प्रबुद्ध कहानीकार बताते हुए कहा है कि उन्होंने अपनी कहानियों के द्वारा समाज के मध्यमवर्गीय लोगों के जीवन को बखूबी चित्रित करते हुए उनके सपनों, समस्याओं और महिला-पुरूष संबंधों को उभारा है। श्री कज़ाक ने अपनी जि़ंदगी के अनुभव के द्वारा कमाई गई मनोविज्ञानिक सूझ के साथ कामगार लोगों की मेहनत मुशक्कत और मेहनती जि़ंदगी संबंधी यादगार कहानियाँ लिखी हैं। अंतहीन के अलावा पानी दी कंध, दरअसल, मिट्टी दा माधो, डूंमना और जड़ां उसकी उच्च कोटी की कहानियाँ हैं, जो कई दशकों तक पंजाबी साहित्य में चर्चित रहेंगी।
उच्च शिक्षा और भाषा मंत्री ने कहा कि श्री कज़ाक ने न सिफऱ् साहित्यक क्षेत्र में बल्कि उन्होंने अपने निजी जीवन में भी कठोर मेहनत की है। उन्होंने कहा कि सिफऱ् दसवीं कक्षा पास करके कड़ी साहित्यक मेहनत के द्वारा पंजाबी यूनिवर्सिटी में प्रोफैसर के पद पर पहुँचना अपने आप में बेमिसाल उपलब्धि है।

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