कर्ज लेकर नहीं बल्कि घातक बिजली समझौते रद्द करके ही पंजाब में सस्ती हो सकेगी बिजली: हरपाल सिंह चीमा

HARPAL CHEEMA
ਪੈਟਰੋਲ-ਡੀਜ਼ਲ ਦੀਆਂ ਕੀਮਤਾਂ ਨੇ ਮਹਿੰਗਾਈ ਨੂੰ ਲਾਈ ਅੱਗ, ਪੰਜਾਬ ਅਤੇ ਕੇਂਦਰ ਸਰਕਾਰਾਂ ਹਨ ਜਿੰਮੇਵਾਰ: ਹਰਪਾਲ ਸਿੰਘ ਚੀਮਾ
– वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल के बिजली सस्ती करने के दावों पर आप ने उठाए सवाल
– बिजली उपभोक्ताओं की जेब काटने के बजाय बिजली माफिया पर नकेल कसे सरकार : आप
– कहा, केजरीवाल की बिजली की गारंटी ने कांग्रेस और बादलों की उड़ाई नींद

 

चंडीगढ़, 3 अक्टूबर 2021

आम आदमी पार्टी (आप) के वरिष्ठ नेता और नेता प्रतिपक्ष हरपाल सिंह चीमा ने वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल के राज्य में बिजली सस्ती करने के दावे पर सवाल उठाया है। साथ भी दावा किया कि अरविंद केजरीवाल द्वारा पंजाब के लोगों को दी गई बिजली की गारंटी ने सत्ताधारी कांग्रेस और बादलों को नींदें उड़ा दी हैं। नतीजतन, आज मनप्रीत सिंह बादल जैसे मौकापरस्त राजनेता भी, जो कभी बादल सरकार के वित्त मंत्री थे और पिछले साढ़े चार साल से कांग्रेस सरकार के वित्त मंत्री हैं,  महंगी बिजली के मुद्दे पर चुप हैं ।

और पढ़ो :-एचएसआईआईडीसी को भारत सरकार ने ‘परियोजना कार्यान्वयन एजेंसी’ के रूप में दी स्वीकृति

रविवार को पार्टी मुख्यालय से जारी एक बयान में हरपाल सिंह चीमा ने वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल द्वारा राज्य में बिजली सस्ती करने संबंधी अपने कांग्रेसी नेताओं को दिए जा  रहे भरोसे पर तंज कसते हुए कहा कि ” चलो देर से ही सही वित्त मंत्री साहब को यह तो पता चला कि पंजाब में बिजली बहुत महंगी है और बड़ा मुद्दा है।

अगर आम आदमी पार्टी ने पिछली बादल सरकार द्वारा निजी बिजली कंपनियों के साथ किए  महंगे और एकतरफा समझौतों के खिलाफ कड़ा रुख नहीं अपनाया होता। अगर आम आदमी पार्टी निजी बिजली कंपनियों के साथ पिछली बादल सरकार द्वारा किए गए महंगे तथा एकतरफा समझौतों के खिलाफ मोर्चा न खोलती। बिजली आंदोलन के तहत घर-घर जाकर पंजाब के लोगों को बेहद महंगे बिजली के बिलों और बिजली माफिया के खिलाफ लामबंद न करती। 2022 में आप की सरकार बनने पर केजरीवाल द्वारा 300 यूनिट तक मुफ्त तथा 24 घंटे बिजली सप्लाई जैसी गारंटी प्रोग्राम का ऐलान नहीं किया जाता तो वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल, मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी तथा पूर्व मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल कभी भी सस्ती बिजली की बात न करते। इतना ही नहीं  अगर चुनाव सर पर न होते तो इन्होंने  बिजली के मुद्दे पर कोई बात नहीं करनी थी,क्योंकि बादलों की तरह कांग्रेसी भी  बिजली कंपनियों के साथ मिलकर दलाली खा रहे हैं।”

चीमा ने कहा कि लोकतंत्र में सरकारों का मूल कर्तव्य लोक कल्याण के लिए ज्यादा से ज्यादा राहत और सुविधाएं प्रदान करना होता है। यह सुनिश्चित करना होता है कि किसी भी स्तर पर लोगों का सामाजिक-आर्थिक समेत किस भी प्रकार का शोषण न हो, लेकिन पंजाब में पिछले ढाई से तीन दशकों से उल्टा ही हो रहा है। माफिया के साथ मिलकर यहां की सरकारें राज्य के सभी संसाधनों और लोगों को लूट रही हैं। बिजली माफिया, रेत माफिया, परिवहन माफिया, केबल माफिया और शराब माफिया समेत ऐसे दर्जनों उदाहरण हैं।

हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि इसी कारण आम आदमी पार्टी को वित्त मंत्री से स्पष्टीकरण मांगना पड़ रहा है कि बिजली सस्ती करने की सरकार के पास क्या नीति है? क्या निजी बिजली कंपनियों के साथ महंगे समझौते रद्द कर सरकार बिजली सस्ती कर रही है? या फिर वोट बटोरने के लिए और कर्ज लेकर कम समय के लिए सस्ती बिजली के नाम पर लोगों को एक बार फिर गुमराह किया जा रहा है?

चीमा ने कहा कि बादल भाजपा तथा कांग्रेस के पिछले 25 सालों के शासन के दौरान पंजाब पर 3 लाख करोड़ से अधिक कर्ज हो चुका है। कर्जे का ब्याज लौटाने के लिए भी कर्ज लिया जा चुका है।

चीमा ने कहा कि कोई भी सरकार कर्ज लेकर लोगों को राहत नहीं दे सकती। अंत में ऐसी घोषणाओं और लोक लुभावन योजनाओं का भार राज्य की जनता पर ही पड़ता है। इसलिए वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल और मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को यह स्पष्ट करना चाहिए कि किस वित्तीय योजना से बिजली सस्ती की जा रही है?

हरपाल सिंह चीमा ने दलील दी कि पंजाब के लोगों को महंगी बिजली से तब तक स्थायी राहत नहीं मिल सकती जब तक कि बिजली कंपनियों के साथ घातक बिजली खरीद समझौते रद्द नहीं किए जाते।