डिजिटल दुष्प्रचार का उपयोग समाज को अस्थिर करने और राष्ट्रीय हितों को कमजोर करने के लिए किया जा रहा है: डॉ. प्रदीप

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जम्मू, 13 फरवरी 2026

फर्जी खबरों और सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक सूचनाओं का बढ़ता हुआ खतरा अब व्यक्तियों को बदनाम करने, तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने और समाज को अस्थिर करने के एक साधन के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है, यह बात जम्मू-कश्मीर भाजपा के मीडिया प्रभारी डॉ. प्रदीप माहोत्रा ने गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कही।

उन्होंने कहा कि इस समस्या से निपटने के लिए त्वरित सुधारात्मक कदम उठाए जाने आवश्यक हैं, जिनमें साइबर कानूनों का सख्ती से पालन, प्रभावी फैक्ट-चेकिंग तंत्र की स्थापना, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही सुनिश्चित करना तथा व्यापक डिजिटल साक्षरता अभियान चलाना शामिल है, ताकि नागरिक भ्रामक सामग्री की पहचान कर उसे अस्वीकार कर सकें, इससे पहले कि वह अपूरणीय क्षति पहुंचाए।

डॉ. प्रदीप माहोत्रा ने कहा कि डिजिटल युग में दुष्प्रचार अभूतपूर्व गति से फैलता है और कुछ ही मिनटों में लाखों लोगों तक पहुंच जाता है, जबकि इससे प्रतिष्ठा और सार्वजनिक व्यवस्था को जो नुकसान होता है, वह सामग्री हटाए जाने या सुधारे जाने के बाद भी लंबे समय तक बना रहता है।

उन्होंने कहा कि फर्जी खबरें, मॉर्फ की गई तस्वीरें और छेड़छाड़ किए गए वीडियो जानबूझकर राजनीतिक नेताओं की छवि खराब करने, संस्थाओं को बदनाम करने और आम जनता को गुमराह करने के लिए प्रसारित किए जाते हैं। जब तक ऐसी दुर्भावनापूर्ण सामग्री हटाई जाती है, तब तक कथानक स्थापित हो चुका होता है, भावनाएं भड़क चुकी होती हैं और अपूरणीय क्षति हो चुकी होती है। इससे लोकतांत्रिक संस्थाओं पर जनता का विश्वास कमजोर होता है और समाज में भ्रम की स्थिति पैदा की जाती है।

डॉ. प्रदीप ने कहा कि दुष्प्रचार में जनभावनाओं को भड़काने, अशांति फैलाने और गंभीर कानून-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न करने की खतरनाक क्षमता होती है। उन्होंने कहा कि झूठे आख्यानों को अक्सर समुदायों और क्षेत्रों के बीच विभाजन को गहरा करने के उद्देश्य से तैयार किया जाता है, जिससे सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचता है और भावनात्मक उबाल की स्थिति पैदा होती है। ऐसे प्रयास समाज में अविश्वास और ध्रुवीकरण फैलाने के लिए किए जाते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्रीय सीमाओं के बाहर बैठे शत्रुतापूर्ण तत्व और संचालक डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का दुरुपयोग कर संवेदनशील और भ्रामक सूचनाएं फैलाते हैं, जिनका उद्देश्य राष्ट्रीय हितों को नुकसान पहुंचाना होता है। इन शक्तियों में सार्वजनिक विमर्श को प्रभावित करने, लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में हस्तक्षेप करने और राष्ट्र की एकता एवं अखंडता को कमजोर करने की क्षमता होती है।

डॉ. प्रदीप माहोत्रा ने बताया कि हाल ही में जम्मू-कश्मीर विधानसभा में भाजपा सदस्यों द्वारा फर्जी खबरों और छेड़छाड़ किए गए वीडियो के प्रसार को लेकर गंभीर चिंता जताई गई, जो सार्वजनिक विश्वास को नुकसान पहुंचाते हैं और राजनेताओं व सरकारी नीतियों को बदनाम करते हैं। इस चिंता का सदन के सभी सदस्यों द्वारा समर्थन किया गया, जो इस बढ़ते खतरे से निपटने के सामूहिक संकल्प को दर्शाता है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि साइबर कानूनों का कड़ाई से पालन, नागरिकों में डिजिटल साक्षरता का विस्तार और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदार भूमिका अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने दोहराया कि सत्य की रक्षा और सामाजिक सौहार्द बनाए रखना संस्थाओं, मीडिया और नागरिकों की साझा जिम्मेदारी है।