“आप” का बादलों से सवाल, सब्जियों पर एम.एस.पी और पुरानी पेंशन स्कीम की बहाली 2017 तक क्यों नहीं याद आई?
जब तक बेअदबी के दाग हैं, बादल सत्ता के सपने न देखे: “आप”
चंडीगढ़, 6 जनवरी 2022
आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के वरिष्ठ नेता और नेता प्रतिपक्ष हरपाल सिंह चीमा ने शिरोमणि अकाली दल (बादल) के प्रधान और पूर्व उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल को उनकी हर बात पर घेरा और पूछा कि पंजाब में अपने 1997 से 2002 और 2007 से 2017 तक उनकी सरकार के दौरान बादलों को पंजाब की जनता से संबंधित ये मुद्दे क्यों याद नहीं आए? बादल परिवार पंजाब के लोगों को यह स्पष्ट करें कि क्या उनके शासन में ये मुद्दे और संकट नहीं थे?
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बुधवार को पार्टी मुख्यालय से जारी बयान में हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि आज सुखबीर सिंह बादल यह कह रहे हैं,’वह (बादल) चाहते हैं कि पंजाब में प्रत्येक बीए पास को 5000 नहीं बल्कि 50,000 की नौकरी मिले।” लेकिन सवाल यह है कि बादलों को ऐसे अच्छे ख्याल सत्ता से बाहर रहने पर ही क्यों याद आते हैं? पंथ और पंजाब समेत युवाओं-बेरोजगारों, किसानों-मजदूरों और सरकारी स्कूलों-अस्पतालों की चिंता सत्ता में रहते हुए क्यों नहीं की जाती?
हरपाल सिंह चीमा ने पंजाब की जनता से अपील करते हुए कहा कि बादलों के परिवार को भूलकर भी सत्ता में न लाएं,क्योंकि ये सत्ता से बाहर रहते हुए ही पंजाब, पंजाबियत और पंजाबियों का भला सोचने को मजबूर होते हैं, जबकि सत्ता में रहते हुए माफिया और मोह माया का शिकार हो जाते हैं,अर्थात बादल एंड कंपनी को पंजाब के राजपाठ से दूर रखने में ही भलाई है।
चीमा ने सुखबीर सिंह बादल से पूछा कि सब्जियों,फलों,बासमती और आलुओं पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एम.एस.पी) का मुद्दा दशकों पुराना है। इस दौरान 15 साल तक प्रकाश सिंह बादल खुद मुख्यमंत्री की कुर्सी पर आसीन थे, उस समय सुखबीर सिंह बादल को फल और सब्जी उत्पादक किसानों की गुहार क्यों नहीं सुनाई दी? सड़कों के किनारे पड़े आलुओं के ढेर क्यों नहीं दिखाई दिए?
हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि पंजाब में पुरानी पेंशन स्कीम साल 2004 में कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार ने बंद कर दी थी, उसके बाद 2007 से 2017 तक बादल परिवार ने पुरानी पेंशन स्कीम लागू करने का फैसला क्यों नहीं लिया? उसी प्रकार पंजाब के सरकारी स्कूल और अस्पतालों की हालत बादल सरकार के समय भी दयनीय थी, उस वक्त शिक्षा और सेहत जैसे मुद्दे उनके मुख्य एजेंडे में शामिल क्यों नहीं रहे?
हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि आम आदमी पार्टी पहले दिने से दावा करती आ रही है कि “आप” राजनीति करने नहीं बल्कि बदलने आई है और आज सुखबीर सिंह बादल, मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और नवजोत सिंह सिद्धू समेत सारे अकाली, कांग्रेसी और भाजपाई उन योजनाओं का ऐलान कर रहे हैं, जिन्हें दिल्ली में केजरीवाल सरकार पहले ही लागू कर चुकी है और पंजाब के लिए आप सुप्रीमो केजरीवाल गारंटियों दे चुके हैं।
चीमा ने कहा कि बादलों समेत कांग्रेस, कैप्टन और भाजपा को तब तक पंजाब की सत्ता के सपने देखना बंद कर देना चाहिए जब तक श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी समेत जगह जगह हो रही धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी के दाग इन सियासी दलों के दामन से नहीं मिटते और ये तब तक नहीं मिट सकते जब तक दोषियों को सजा और संगत को इंसाफ नहीं मिल जाता।
चीमा ने कहा कि बार-बार मौका देने के बावजूद कांग्रेस, कैप्टन, बादल और भाजपा ने पंजाब और पंजाबियों की पीठ पर छुरा घोंपा है, इसलिए अब पंजाब की जनता ने एक मौका आम आदमी पार्टी को देने का मन बना लिया है।

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